नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने JEE Main 2026 Session 2 से जुड़ी महत्वपूर्ण टाइमलाइन जारी कर दी है. इस अपडेट का इंतजार लंबे समय से लाखों उम्मीदवार कर रहे थे. अब रिजल्ट, आंसर की और दूसरी प्रक्रियाओं की तारीखें साफ हो गई हैं. यह परीक्षा देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. हर साल लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं और इस बार भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने भाग लिया. इस बार JEE Main 2026 Session 2 के लिए करीब 11.23 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. परीक्षा का आयोजन भारत और विदेश के 318 शहरों में बनाए गए 566 केंद्रों पर किया गया.
परीक्षा कुल 6 दिनों में 10 अलग अलग सत्रों में आयोजित की गई थी. यह व्यवस्था इसलिए की गई ताकि बड़ी संख्या में छात्रों को आसानी से परीक्षा में शामिल किया जा सके. NTA के अनुसार इस बार 93 प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति दर्ज की गई. वहीं 97 प्रतिशत उम्मीदवारों का आधार आधारित प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक किया गया. इससे परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा मजबूत हुई है.
JEE Main 2026 Session 2 की प्रक्रिया 9 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है. इस दिन सभी प्रश्न पत्र जारी किए जाएंगे ताकि छात्र अपने उत्तरों का मिलान कर सकें. इसके बाद 11 अप्रैल 2026 को संभावित उत्तर कुंजी जारी होने की उम्मीद है. इसी के साथ उम्मीदवार अपनी रिस्पॉन्स शीट भी देख पाएंगे. अगर किसी छात्र को किसी प्रश्न या उत्तर पर आपत्ति होती है तो वह प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर अपनी चुनौती दर्ज कर सकता है. यह प्रक्रिया छात्रों को निष्पक्षता सुनिश्चित करने का मौका देती है.
🚀 The countdown to JEE (Main) Session 2 results begins!
📝 April 9: Release of question papers.
🔑 April 11 (tentative): Provisional Answer Key & Challenges open (₹200/question).
🏆 April 20 (tentative): Paper 1 Results & Final Rankings.
The best of your two sessions will be… pic.twitter.com/6Fc03lDQYv— National Testing Agency (@NTA_Exams) April 8, 2026Also Read
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Paper 1 का रिजल्ट 20 अप्रैल 2026 को जारी होने की संभावना है. इस दिन लाखों छात्रों का इंतजार खत्म होगा. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपने स्कोर और ऑल इंडिया रैंक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इसके आधार पर आगे की काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी.
NTA ने यह भी साफ किया है कि अंतिम रैंक तैयार करते समय दोनों सत्रों के स्कोर को ध्यान में रखा जाएगा. लेकिन इसमें उम्मीदवार के सर्वश्रेष्ठ स्कोर को ही माना जाएगा. इस प्रक्रिया में नॉर्मलाइजेशन पद्धति का उपयोग किया जाएगा. इससे अलग अलग सत्रों में परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच निष्पक्ष तुलना संभव हो पाती है.