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India Daily

मिडिल-ईस्ट में जंग से LPG सप्लाई चेन ध्वस्त, हालात सुधरने में लगेंगे 3-4 साल; क्या और बढ़ेंगे दाम?

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध का असर भारत पर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने ग्लोबल LPG  सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
मिडिल-ईस्ट में जंग से LPG सप्लाई चेन ध्वस्त, हालात सुधरने में लगेंगे 3-4 साल; क्या और बढ़ेंगे दाम?
Courtesy: X

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध का सीधा असर अब आम आदमी की रसोई और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दिखने लगा है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही सैन्य तनातनी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने ग्लोबल LPG सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालात इस कदर गंभीर हैं कि एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इस सप्लाई चेन को पूरी तरह से पटरी पर लौटने में 3 से 4 साल तक का लंबा वक्त लग सकता है.

क्या है संकट की असली वजह?

भारत अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है. जंग छिड़ने से पहले इस आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंचता था. ईरान द्वारा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों के बाद अब यह सप्लाई घटकर 55 फीसदी रह गई है.

सप्लाई के अहम स्रोत बंद

अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "सप्लाई के कई अहम स्रोत बंद हो गए हैं. अभी यह साफ नहीं है कि तेल के कुएं पूरी तरह बर्बाद हुए हैं या सिर्फ उत्पादन रोका गया है. लेकिन सप्लायर्स ने स्पष्ट कर दिया है कि इस नुकसान की भरपाई में कम से कम 3 साल का समय लगेगा."

कीमतों में उछाल और कम स्टोरेज की चुनौती

रुबिक्स डेटा साइंसेज और वायाना ट्रेडएक्सचेंज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैकल्पिक रास्ते खोजने के बावजूद 40-50 प्रतिशत सप्लाई प्रभावित रह सकती है. चिंता की बात यह है कि भारत में सालाना 33 मिलियन टन LPG की मांग है, लेकिन हमारी स्टोरेज क्षमता महज 15 दिनों की खपत के बराबर है. सप्लाई घटने, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से कीमतों में आग लग गई है. बीते दिनों घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी पहले ही दर्ज की जा चुकी है.

अर्थव्यवस्था पर चौतरफा मार

भारत अपनी LPG जरूरतों (करीब 92%) के लिए UAE (41%), कतर (22%) और सऊदी अरब जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भर है. महंगी गैस की मार सीधे तौर पर होटलों, रेस्टोरेंट्स और MSME सेक्टर के कारोबार पर पड़ रही है. इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों पर भी सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है.

सरकार का प्लान-B तैयार

राहत की बात यह है कि सरकार ने संकट से निपटने के लिए कमर कस ली है. कोविड-19 के समय अपनाए गए इमरजेंसी प्लान को फिर से लागू किया जा रहा है. सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि घरों में गैस की किल्लत न हो. इसके लिए आयात के नए स्रोत तलाशने, जहाजों के रूट बदलने और देश की रिफाइनरियों में स्थानीय उत्पादन को अधिकतम करने पर जोर दिया जा रहा है.