बुधवार को श्रीनगर के कश्मीर हाट में ‘नो योर आर्टिजन्स’ कार्यक्रम चल रहा था. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वहां उद्घाटन का रिबन काटने पहुंचे लेकिन उन्होंने रिबन काटने से इनकार कर दिया क्योंकि रिबन केसरिया, सफेद और हरे रंग की तिरंगी धारियों वाली थी. जैसे ही अब्दुल्ला ने यह देखा, उन्होंने कैंची उठाने से मना कर दिया. उन्होंने रिबन को काटने के बजाय हाथ से खोला, व्यवस्थापकों को लौटाया और सम्मानपूर्वक रखने का निर्देश दिया. यह घटना वहां मौजूद लोगों के कैमरों में कैद हो गई.
उमर अब्दुल्ला का यह कदम प्रतीकात्मक और कानूनी दोनों रूप से महत्वपूर्ण है. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज को काटना, फाड़ना या किसी भी तरह का अपमान करना अपराध माना गया है. हालांकि रिबन पर तिरंगे के रंग थे, लेकिन यह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था. फिर भी मुख्यमंत्री ने सतर्कता बरती. वह नहीं चाहते थे कि किसी भी तरह से तिरंगे के रंगों के साथ छेड़छाड़ का गलत संदेश जाए. उनके साथ उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, सलाहकार नासिर असलम वानी और अन्य अधिकारी मौजूद थे.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कहीं उद्घाटन के लिए गए थे, वहाँ काटने के लिए जो फीता लगा था वह तिरंगा था।
— Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک (@Ashok_Kashmir) April 15, 2026
उमर ने तिरंगे को काटने से मना कर दिया और उसे करीने से फोल्ड करने को कहा।
फिर भी कल कोई दो कौड़ी का एंकर उनसे देशभक्ति का सर्टिफिकेट मांग लेगा... pic.twitter.com/3wHG1iOpF5
गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट पहले भी एक ऐतिहासिक फैसले में कह चुका है कि तिरंगे के रंगों वाले केक या अन्य वस्तुओं को काटना अपराध की श्रेणी में नहीं आता, जब तक कि वे वास्तविक राष्ट्रीय ध्वज न हों. इस न्यायिक स्पष्टीकरण के बावजूद, अब्दुल्ला ने जोखिम नहीं लिया. उन्होंने रिबन को कैंची से काटने से इनकार किया और कहा कि इसे खोलकर सम्मानपूर्वक रखा जाए. यह व्यवहार किसी राजनेता की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है.
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. लोग अब्दुल्ला के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं. कई उपयोगकर्ताओं ने इसे संवैधानिक सम्मान और सूझबूझ का उदाहरण बताया. विपक्षी नेताओं ने भी इस मौके पर बिना राजनीति किए अब्दुल्ला के निर्णय को सराहा. कार्यक्रम के आयोजकों ने बाद में बताया कि रिबन अनजाने में तिरंगे जैसी बन गई थी, और उन्होंने मुख्यमंत्री के फैसले का सम्मान करते हुए रिबन को संभाल कर रख लिया.