नई दिल्ली: सफर का मजा दोगुना हो जाता है जब आप अपनी गाड़ी से जाते हैं. इससे बार-बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट में होने वाली झंझट से आपको छुटकारा मिल जाता है. लेकिन तब क्या जब डेस्टिनेशन कोई पहाड़ी राज्य हो. गाड़ी तो होती है लेकिन मन में एक डर और सवाल भी गोते लगाने लगते है. पहाड़ों में रास्ते समतल नहीं होते हैं. इसलिए वहां ड्राइविंग करना किसी स्किल से कम नहीं. लेकिन अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है. हम आपको कुछ ऐसे टिप्स और ट्रिक्स बताएंगे जिससे आपका काम आसान हो जाएगा.
शहरों की सीधी सड़कों के मुकाबले पहाड़ों की घुमावदार राहें और खतरनाक मोड़ ड्राइवर की परीक्षा लेते हैं. यहां छोटी सी गलती भी गंभीर हादसे में बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले जरूरी सावधानियां जानना बेहद अहम हो जाता है.
पहाड़ों पर ड्राइविंग करते समय गियर का सही चुनाव बेहद जरूरी होता है. अक्सर लोग चढ़ाई और ढलान में अलग-अलग गियर का गलत इस्तेमाल कर बैठते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जिस गियर में गाड़ी चढ़ाई पर चलाई जाती है, उसी गियर में ढलान पर उतरना सुरक्षित रहता है. इससे इंजन ब्रेकिंग मिलती है और वाहन नियंत्रण में रहता है. न्यूट्रल गियर में गाड़ी चलाना या बार-बार ब्रेक दबाना खतरनाक हो सकता है.
पहाड़ी सड़कों पर ओवरटेक करना जोखिम भरा होता है. खासकर अंधे मोड़ों पर यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि सामने से आने वाली गाड़ी का अंदाजा नहीं होता. हमेशा सीधी सड़क मिलने पर ही ओवरटेक करें और हॉर्न देकर संकेत दें. इसके अलावा, चढ़ाई पर जा रहे वाहन को प्राथमिकता देना नियम और सुरक्षा दोनों के लिहाज से जरूरी होता है.
पहाड़ों पर जाने से पहले वाहन की पूरी जांच बेहद जरूरी है. ब्रेक ऑयल, ब्रेक पैड्स और टायर की स्थिति अच्छी होनी चाहिए. लगातार ब्रेक लगाने से ब्रेक सिस्टम जल्दी गर्म हो सकता है, जिससे उसकी क्षमता कम हो जाती है. वहीं, घिसे हुए टायर फिसलन का कारण बन सकते हैं, खासकर तेज मोड़ों पर. इसलिए यात्रा से पहले सर्विसिंग कराना समझदारी भरा कदम है.
पहाड़ों पर मौसम पलभर में बदल सकता है. अचानक धुंध या बारिश होने पर विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में फॉग लाइट्स और हैजार्ड लाइट्स का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है. साथ ही, लैंडस्लाइड वाले इलाकों से गुजरते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके.
पहाड़ी इलाकों में रात के समय ड्राइविंग करना जोखिम भरा हो सकता है. अंधेरे में सड़क की स्थिति और मोड़ों का सही अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है. अगर जरूरी न हो तो रात में यात्रा से बचना चाहिए. दिन के उजाले में सफर करना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक रहता है, जिससे ड्राइवर को बेहतर नियंत्रण और दृश्यता मिलती है.