Halloween 2025: हैलोवीन से मिलते जुलते हैं ये 5 भारतीय त्योहार, इनके बारे में जानकर हो जाएंगे हैरान
क्या आपको पता है भारत में भी कुछ ऐसे त्योहार हैं जो हैलोवीन से मिलते-जुलते हैं. इनमें भूत चतुर्दशी से लेकर केरल के थेय्यम जैसे त्योहार शामिल हैं.
नई दिल्ली: हैलोवीन भले ही अपने कद्दू, कॉस्ट्यूम और भूतिया कहानियों के लिए जाना जाता हो लेकिन भारत में भी लंबे समय से रहस्य और जादू के अपने तरीके मनाए जाते रहे हैं. पूरे देश में रात भर दीए जलते रहते हैं, डांसर आत्माओं का रूप लेते हैं और आग की रोशनी में अनदेखी चीजों की कहानियां शेयर की जाती हैं.
बंगाल की भूत चतुर्दशी से लेकर केरल के थेय्यम तक, हर इलाका रोशनी और अंधेरे के इस हमेशा रहने वाले आकर्षण में अपनी अलग लय जोड़ता है. कुछ बदलते मौसम को दिखाते हैं, दूसरे लोककथाओं का सम्मान करते हैं लेकिन सभी में हैरानी और गर्मजोशी का वही मेल होता है. यह इस बात का सबूत है कि भारत के त्योहारों के कैलेंडर में हैलोवीन का अपना ही माहौल है.
यहां पांच भारतीय परंपराओं पर एक नजर डालते हैं जो हैलोवीन के सार को दिखाती हैं.
भूत चतुर्दशी
भूत चतुर्दशी, दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है. परिवार शाम को 14 दीये जलाते हैं ताकि नेगेटिव एनर्जी दूर रहे. दीयों को कोनों में, खिड़कियों के पास और तुलसी के पौधे के चारों ओर रखा जाता है जिससे घर की हर छायादार जगह रोशन हो जाती है. यह कहानी सुनाने की रात भी होती है, जब बड़े-बुज़ुर्ग पुरखों और दोस्ताना आत्माओं की कहानियां सुनाते हैं, जिससे घरों में उत्सुकता और आराम दोनों भर जाते हैं.
काटी बिहू (असम)
काटी बिहू, असम का त्योहार है जो अक्टूब या दिवाली के आसपास आता है. असम के गांवों में, काटी बिहू मौसमों के बदलने और खेती के नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक है. गांव वाले खेतों और अनाज के गोदामों में बांस के खंभों पर छोटे दीए जलाते हैं, ताकि फसलों को कीड़ों से बचाया जा सके और फसल के लिए अच्छी किस्मत लाई जा सके.
कार्तिक पूर्णिमा (उत्तर और पश्चिम भारत)
कार्तिक पूर्णिमा, नवंबर में मनाई जाती है. जैसे ही पूरा चांद निकलता है, नदियां सैकड़ों तैरते हुए दीयो से जगमगा उठती हैं. परिवार और समुदाय रोशनी, आभार और बदलते मौसम का जश्न मनाने के लिए पानी के पास इकट्ठा होते हैं. रात में एक शांत लेकिन रहस्यमयी एहसास होता है जहां सोच और जश्न का मेल होता है और दीयों की हल्की चमक एकता और शांति की तस्वीर बनाती है.
भूत कोला (तुलु नाडु – तटीय कर्नाटक)
भूत कोला की रात कर्नाटक के तटीय जिलों में, भूत कोलाब रात भर चलने वाले ड्रामा वाले शो के जरिए लोकगीतों को जिंदा कर देता है. कलाकार, जो अक्सर खानदानी परिवारों से होते हैं, शानदार कॉस्ट्यूम, शानदार मेकअप और डांस के जरिए स्थानीय आत्माओं, जिन्हें भूत कहा जाता है को दिखाते हैं. यह इवेंट आग से जगमगाते आसमान और ढोल की थाप के नीचे होता है, जहां गांव वाले हिम्मत और इंसाफ की कहानियां देखने के लिए इकट्ठा होते हैं कुछ परफॉर्मेंस, कुछ ओरल हिस्ट्री.
थेय्यम (उत्तरी मालाबार, केरल)
थेय्यम, केरल के सबसे मनमोहक रिचुअल आर्ट फॉर्म में से एक, थेय्यम डांस, थिएटर और बदलाव को मिलाता है. कलाकार चमकीले फेस पेंट, सजे-धजे कॉस्ट्यूम और ऊंची टोपी पहनते हैं, जो पूर्वजों या पौराणिक किरदारों को एक ट्रान्स जैसी हालत में दिखाते हैं.