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पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने शपथ ग्रहण के लिए क्यों चुनी ये तारीख? हर बंगाली के लिए है खास

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है. मिल रही जानकारी के मुताबिक शपथ ग्रहण पच्चीशे बैशाख के दिन होंगे. इस दिन बंगाल में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का उत्सव भी है.

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Edited By: Shanu Sharma
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने शपथ ग्रहण के लिए क्यों चुनी ये तारीख? हर बंगाली के लिए है खास
Courtesy: ANI

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की है. अब शपथ ग्रहण की तैयारी की जा रही है, इसके लिए तारीख भी तय कर ली गई है. मिल रही जानकारी के मुताबिक 9 मई को पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण सामारोह आयोजित किया जा रहा है. 

बीजेपी ने शपथ ग्रहण की तारीख काफी सोच, समझकर तय की है. यह दिन हर बंगालियों के लिए खास है, क्योंकि बंगाली कैलेंडर के मुताबिक इस दिन बंगाल के गुरुदेव और विश्वकवि कहे जाने वाले रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है. इस दिन पूरे  राज्य में पच्चीशे बैशाख मनाया जा एगा. 

रवींद्रनाथ टैगोर और बंगाल का कनेक्शन

बता दें कि बंगाल में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का उत्सव पारंपरिक बंगाली कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है. जिस दिन उनके जन्मदिवस को मनाया जाता है, उस दिन को 'पच्चीशे बैशाख' कहते हैं. यह आमतौर पर बैशाख महीने का 25वां दिन होता है. जिसके कारण अलग-अलग साल में जयंती की तारीख भी अलग होती है. इस बार यह खास तारीख 9 मई को है और बीजेपी इसी दिन शपथ ग्रहण समारोह करने की तैयारी में ताकी लोग इसे अपने संस्कृति से जुड़ा हुआ महसूस करें. देश में बंगाल के रवींद्रनाथ टैगोर को बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति के रूप में सम्मान दिया जाता है. टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति हैं, जिन्हें यह पुरस्कार कविता संग्रह 'गीतांजलि' के लिए दिया गया था. संगीत से लेकर, दृश्य  कला और शिक्षा के क्षेत्र में भी टैगोर का प्रभाव गहरा है.

ममता बनर्जी को 15 साल बाद छोड़नी पड़ेगी कुर्सी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत भी एक ऐतिहासिक घटना है. राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी सत्ता में काबिज होने जा रही है. इस जीत के पीछे सत्ता विरोधी लहर और बीजेपी के चुनावी वादों का श्रेय दिया जा रहा है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी को इस चुनाव में करारी हार मिली है. 2011 के बाद अब ममता बनर्जी को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि राज्य का मुख्य मंत्री कौन बनेगा लेकिन सुवेंदु अधिकारी को इस पद का प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा है. आने वाले समय में स्थिति और भी ज्यादा साफ होगी.