आधी रात के बाद बंगाल में क्या होगा? ममता की जिद ने बढ़ाया सस्पेंस, राष्ट्रपति शासन की चर्चा तेज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा होता दिख रहा है. चुनाव में हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है. चुनाव में हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है. उनके इस फैसले ने राज्य में संवैधानिक संकट की चर्चाओं को तेज कर दिया है. अब सभी की नजरें राजभवन और राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं. विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी बीच भाजपा ने स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा मजबूत कर दिया है.
ममता के फैसले से बढ़ा सियासी तनाव
तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं. उनका कहना है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुए. इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया है. राजनीतिक जानकार इसे विरोध का प्रतीक मान रहे हैं, लेकिन इससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है.
संविधान में क्या है प्रावधान?
संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, किसी भी विधानसभा का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा नहीं हो सकता. कार्यकाल समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री का पद भी कानूनी रूप से खत्म माना जाता है. संवैधानिक विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में राज्यपाल मुख्यमंत्री को पद छोड़ने का निर्देश दे सकते हैं और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.
राष्ट्रपति शासन की चर्चा क्यों?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नई सरकार के शपथ ग्रहण तक राज्य में अल्प अवधि के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुरानी सरकार पद नहीं छोड़ती, तो प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए यह विकल्प अपनाया जा सकता है. हालांकि अंतिम फैसला राज्यपाल और केंद्र सरकार की सलाह पर निर्भर करेगा.
भाजपा कैसे बनाएगी सरकार?
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. ऐसे में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं. पार्टी ने शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि नई सरकार तय कार्यक्रम के अनुसार शपथ ले सकती है.
राजभवन में बढ़ी हलचल.
राजभवन में लगातार बैठकों का दौर जारी है. राज्यपाल संवैधानिक सलाहकारों के साथ स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं. प्रशासन और पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो. अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी आखिरी समय में अपना फैसला बदलती हैं या बंगाल एक नए संवैधानिक अध्याय का गवाह बनेगा.