नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है. राज्य की 294 सीटों में से भाजपा ने 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है. हालांकि ममता बनर्जी ने इस हार को स्वीकार करने के बजाय इसे चुनाव आयोग और भाजपा की साजिश करार दिया है. उनका कहना है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि वह नैतिक रूप से चुनाव जीती हैं. इस जिद्द ने राज्य में एक बड़ा संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है
चुनाव आयोग द्वारा भाजपा की जीत को प्रमाणित किए जाने के बाद भी ममता बनर्जी राजभवन जाने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कोलकाता में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उन्हें जनादेश ने नहीं बल्कि एक साजिश ने हराया है. उनका दावा है कि करीब 100 सीटों पर नतीजों को 'लूटा' गया है. ममता के अनुसार उनकी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी जो विपक्षी दल के लिए काम कर रहा था.
वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने ममता बनर्जी के इस रुख को लोकतंत्र के लिए एक 'चुनौती' और 'अपमान' बताया है. उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि एक बार चुनाव नतीजे प्रमाणित हो जाने के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना पूरी तरह अवैध है. जेठमलानी ने ममता को 'अतिक्रमणकारी' कहा और राज्यपाल से मांग की कि उन्हें गरिमा के साथ पद छोड़ने के बजाय अपमानजनक तरीके से बर्खास्त कर कार्यालय से बाहर निकाल देना चाहिए.
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री राज्यपाल के निर्देशन में पद धारण करते हैं. जेठमलानी ने तर्क दिया कि यदि ममता बनर्जी कुर्सी से चिपकी रहती हैं तो राज्यपाल पुलिस को उन्हें वहां से हटाने का निर्देश दे सकते हैं. संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री तभी तक सत्ता में रह सकते हैं जब तक उनके पास सदन का विश्वास हो. बहुमत खोने के बाद राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने और बहुमत प्राप्त दल को आमंत्रित करने का पूरा अधिकार है.
ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि वोटों की गिनती जानबूझकर धीमी की गई ताकि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा सके. टीएमसी प्रमुख ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. ममता ने स्पष्ट किया कि वह राजभवन नहीं जाएंगी क्योंकि भाजपा ने चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग करके उन्हें आधिकारिक रूप से हराया है जबकि जनता का समर्थन अभी भी उनके साथ है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी के व्यक्तिगत इनकार से लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रुक सकती. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है जिसके बाद वह स्वतः ही अपने पद से मुक्त हो जाएंगी. भाजपा ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है और चुनाव आयोग ने नई विधानसभा के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी है. ऐसे में संवैधानिक तंत्र का उपयोग कर जल्द ही राज्य में एक नई निर्वाचित सरकार का गठन सुनिश्चित किया जाएगा.