खुद अपनी ही सीट नहीं बचा सके डीएमके के मुखिया स्टालिन, कोलाथुर में मिली करारी हार
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट नहीं बचा सके और उन्हें कोलाथुर सीट पर टीवीके के 75 साल के उम्मीदवार वीएस बाबू के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके का हाल बुरा हो गया है. आलम ये है कि खुद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट नहीं बचा सके और उन्हें कोलाथुर सीट पर टीवीके के 75 साल के उम्मीदवार वीएस बाबू के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है.
बता दें कि वीएस बाबू स्टालिन के पुराने साथी थे. कोलाथुर सीट स्टालिन का अभेद्द किला माना जाता था. उन्होंने यहां से तीन बार (2011, 2016, 2021) जीत चुके हैं. 2021 में स्टालिन ने AIADMK के आदि राजाराम को हराया था.
इसी साल थामा था टीवीके का दामन
वीएस बाबू इससे पहले टीएमके के विधायक थे. साल 2011 के विधानसभा चुनाव में वे कोलाथुर सीट से एमके स्टालिन के चुनाव के इंचार्ज भी थे लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और AIADMK में शामिल हो गए थे. बाद में 7 फरवरी 2026 को उन्होंने विजय की पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया था.
कौन हैं स्टालिन
स्टालिन का नाम तमिलनाडु के दिग्गज नेताओं में शुमार है. वे राज्य के 5 बार के सीएम रहे एम करुणानिधि के बेटे हैं. साल 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद उन्होंने डीएमके के अध्यक्ष का पद संभाला था. साल 2011 में विल्लिवक्कम का कुछ भाग और पुरासावक्कम विधानसभा का कुछ भाग मिलाकर कोलाथुर विधानसभा सीट बनाई गई थी. इस सीट के बनने से लेकर अब तक स्टालिन ही यहां से विधायक रहे लेकिन इस बार यह सिलसिला टूट गया.
टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी
बात अगर तमिलनाडु में चल रही मतगणना की करें तो ताजा रुझानों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. खबर लिखे जाने तक टीवीके 104, डीएमके 73 और एआईएडीएमके 57 सीटों पर आगे चल रही है. तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 118 सीटें चाहिए. ताजा रुझानों के आधार पर अभी तक कोई भी पार्टी बहुमत का आंकड़ा छूती हुई दिखाई नहीं दे रही है.