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एक चूहे ने बचाई थी हजारों लोगों की जान, गोल्डमेडल से किया गया था सम्मानित; पूरी कहानी जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

मागवा नाम के अफ्रीकी चूहे ने कंबोडिया में 71 लैंडमाइंस खोजकर हजारों लोगों की जान बचाई थी. उसकी बहादुरी के लिए उसे गोल्ड मेडल भी मिला था. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
एक चूहे ने बचाई थी हजारों लोगों की जान, गोल्डमेडल से किया गया था सम्मानित; पूरी कहानी जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
Courtesy: @BiancoDavinci x account

नई दिल्ली: इस दुनिया में बहादुरी की कहानियां अक्सर इंसानों या बड़े जानवरों से जुड़ी होती हैं. बहुत कम लोग यह सोच पाते हैं कि एक छोटा सा चूहा भी ऐसे कारनामे कर सकता है. मगावा एक अफ्रीकी नस्ल का चूहा है. जिसने अपनी असाधारण हिम्मत और सेवा के लिए दुनिया भर में तारीफ बटोरी. आठ साल की उम्र में उसकी मौत की खबर सुनकर कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि उसने अपनी पूरी जिंदगी में हजारों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. 

मगावा को बारूदी सुरंगों और फटे हुए बमों का पता लगाने के लिए खास ट्रेनिंग दी गई थी. लगभग पांच साल के अपने करियर के दौरान उसने कंबोडिया जैसे देशों के बेहद खतरनाक इलाकों में काम किया. ड्यूटी पर रहते हुए उसने सफलतापूर्वक 71 बारूदी सुरंगों और 38 अन्य जिंदा विस्फोटक उपकरणों का पता लगाया. उसकी इस अनोखी काबिलियत की वजह से कई ऐसे इलाके जो पहले इंसानों के लिए बहुत खतरनाक थे, अब सुरक्षित हो गए.

मगावा कैसे करता था काम?

मगावा की सबसे बड़ी खासियत उसका हल्का वजन था. वह इतना हल्का था कि वह बारूदी सुरंगों के ऊपर से सीधे चल सकता था और वे फटती नहीं थीं. वह एक तय इलाके में एक रस्सी से बंधा हुआ. आगे-पीछे घूमता था, और जैसे ही उसे विस्फोटकों की गंध आती थी, वह अपने हैंडलर को इशारा करने के लिए जमीन खरोंचना शुरू कर देता था. सुनने की उसकी तेज शक्ति और जबरदस्त फुर्ती ने इस काम में उसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई.

मगावा को कैसे किया गया सम्मानित?

उसके अमूल्य योगदान को देखते हुए, मगावा को एक ब्रिटिश पशु कल्याण संगठन द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया. यह प्रतिष्ठित सम्मान आमतौर पर कुत्तों जैसे जानवरों को दिया जाता है. हालांकि यह पहली बार था जब किसी चूहे को यह पुरस्कार मिला था. यह उसकी उपलब्धियों की एक बहुत बड़ी पहचान थी. 

किसने दी थी ट्रेनिंग?

मगावा जिसे एक गैर-लाभकारी संस्था APOPO ने ट्रेनिंग दी थी उसने अपने करियर के दौरान 140,000 वर्ग मीटर से ज्यादा इलाके की जांच की. यह इलाका लगभग 20 फुटबॉल मैदानों जितना बड़ा था. उसके काम की बदौलत, लाखों लोग एक बार फिर सुरक्षित रूप से रह और काम कर पाए.

कब हुआ रिटायर?

मगावा को 2016 में कंबोडिया लाया गया था और 2021 में उसे रिटायर कर दिया गया. उसकी सेवा को याद करते हुए, उसके हैंडलर ने कहा कि हालांकि वह कद-काठी में छोटा था लेकिन उसके साथ काम करना बड़े गर्व की बात थी. जनवरी 2022 में बुढ़ापे के कारण उसका निधन हो गया. 

अब कौन कर रहा उसकी जगह काम?

मगावा के बाद रोनिन नाम का एक और ट्रेंड चूहा अब इस काम को आगे बढ़ा रहा है. रोनिन ने अब तक 100 से ज्यादा लैंडमाइन और कई दूसरे विस्फोटक पदार्थों का पता लगाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है. उसकी ये उपलब्धियां इस बात को और भी साबित करती हैं कि सही ट्रेनिंग मिलने पर, छोटे जीव भी बड़े-बड़े काम कर सकते हैं.