आखिर क्या है Session App जिसका डॉ. उमर ने अपने हैंडलर से बात करने में किया था इस्तेमाल

दिल्ली ब्लास्ट में डॉक्टर उमर ने सेशन ऐप के जरिए ही अपने हैंडलर से बात की थी. यह ऐप क्या है और कैसे इस्तेमाल की जाती है, चलिए जानते हैं.

Grok AI
Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: 10 नवंबर यानि 10/11 का दिन दिल्ली में हमेशा याद रखा जाएगा, क्योंकि यह वो दिन था जब लाल किले के पास एक हुंडई i20 में एक जोरदार ब्लास्ट हुआ, जिसमें अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हो चुके हैं. यह धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज काफी दूर तक सुनाई दी. आस-पास की बिल्डिंगों में इसका प्रभाव देखने को मिला.

जांच एजेंसियों के मुताबिक, धमाके में जिस हुंडई i20 कार का इस्तेमाल हुआ, जिसमें आतंकी डॉक्टर उमर नबी उर्फ उमर मोहम्मद बैठा था. इस जांच के दौरान एक ऐप का नाम भी काफी चर्चा में है Session App. इस ऐप के जरिए ही उमर अपने विदेशी हैंडलर से कॉन्टैक्ट में रहता था. यह सुनकर लोगों के दिमाग में एक सवाल आ रहा है कि आखिर यह ऐप क्या है और कैसे काम करती है. तो चलिए जानते हैं इस बारे में.

Session App क्या है?

हमने इस ऐप को इंटरनेट पर सर्च किया. इसका नाम Session – Private Messenger दिखाई दिया. यह एक मैसेंजर ऐप है, जो प्राइवेट तरह से काम करती है. इसकी खासियत की बात करें तो इसमें कोई सेंट्रल सर्वर नहीं होता, यानी आपकी चैट या डाटा को किसी एक जगह पर स्टोर नहीं किया जाता. यहां की गई कोई भी बात किसी को पता नहीं चल सकती है. गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर के जरिए इस ऐप को उपलब्ध कराया गया है.

Session App India Daily Live Play Store & App Store

कैसे बनाते हैं इस ऐप पर अकाउंट:

इस ऐप में अकाउंट बनाने के लिए फोन नंबर या ईमेल आईडी की भी जरूरत नहीं होती. इसलिए इसे ट्रैक करना बहुत मुश्किल होता है. इस ऐप कंपनी का दावा है कि यह न तो यूजर का डाटा बेचती है और न ही उसे किसी के साथ शेयर करती है. इस वजह से इसका इस्तेमाल सीक्रेट बातचीत के लिए किया जा सकता है.

सूत्रों का कहना है कि उमर का कॉन्टेक्ट तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठे उसके हैंडलर से हो रहा था जिसका कोडनेम UKasa से था. दोनों के बीच बातचीत के लिए सेशन ऐप का इस्तेमाल किया जाता था. खबरों के अनुसार, मार्च 2022 में कुछ लोग भारत से अंकारा गए थे, जिनका इस नेटवर्क से संबंध हो सकता है.

आखिर क्या है व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल?

इस मामले को व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से कनेक्ट किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि यह मामला इसी मॉड्यूल से जुड़ा है. यह एक ऐसा आतंकी नेटवर्क है जिसमें पढ़े-लिखे, प्रोफेशनल और समाज में सम्मानित लोग शामिल होते हैं. इस नेटवर्क में डॉक्टर, इंजीनियर, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर या प्रोफेसर शामिल है. ये लोग अपनी नॉलेज और टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल करके आतंक फैलाने में मदद करते हैं.