रील के जुनून ने ली जान! जर्जर पानी की टंकी से गिरकर एक की मौत; 2 युवकों को बचाने के लिए पहुंची एयर फाॅर्स

सिद्धार्थनगर में रील बनाने के चक्कर में 60 फीट ऊंची टंकी पर चढ़े पांच युवकों के साथ बड़ा हादसा हुआ. एक की मौत हो गई, जबकि दो को वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने 16 घंटे बाद सुरक्षित बचाया.

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Kanhaiya Kumar Jha

सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से रील के चक्कर में कुछ युवाओं के साथ ऐसा हादसा हो गया कि इलाके में हड़कंप मच गया. सोशल मीडिया पर थोड़े से लाइक और व्यूज के चक्कर में पांच दोस्त अपनी जान जोखिम में डालकर एक पुरानी पानी की टंकी पर चढ़ गए. यह लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा शायद उन्हें तब हुआ जब सीढ़ी टूट गई. इस घटना ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं.

शनिवार को कांशीराम आवास कॉलोनी में स्थित करीब 26 साल से बंद एक पानी की टंकी पर पांच युवक चढ़े. लगभग 60 फीट की ऊंचाई पर जाकर उन्होंने वीडियो और रील बनाई. जब वे नीचे उतरने लगे, तो अचानक टंकी की पुरानी सीढ़ी टूट गई. इस हादसे में तीन युवक सीधे नीचे गिर पड़े, जबकि दो अन्य युवकों ने अपनी जान बचाने के लिए लोहे की रॉड पकड़ ली और हवा में लटक गए.

दर्दनाक हादसा और रेस्क्यू की बाधाएं 

नीचे गिरे तीन युवकों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन टंकी के आसपास दलदल होने के कारण हाइड्रोलिक क्रेन वहां तक नहीं पहुंच पाई. प्रशासन को आनन-फानन में 120 मीटर कच्ची सड़क बनानी पड़ी. रात में बारिश शुरू होने से काम और कठिन हो गया, जिससे प्रशासन को सेना से मदद मांगनी पड़ी.

एयरफोर्स का साहसी बचाव अभियान 

हालात की गंभीरता को देखते हुए रविवार सुबह करीब 5:20 बजे एयरफोर्स का MI-17 वी5 हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा. वायुसेना के जवानों ने बेहद सावधानी के साथ टंकी पर फंसे कल्लू और पवन को सुरक्षित नीचे उतारा. ये दोनों बच्चे करीब 16 घंटे तक मौत और जिंदगी के बीच टंकी पर फंसे रहे. सुरक्षित नीचे आने के बाद दोनों की जान में जान आई और परिजनों ने राहत की सांस ली.

इस हादसे में जान गंवाने वाला एक लड़का मोहाना थाना क्षेत्र के जुगलीपुर का निवासी था. घायलों में शास्त्री नगर का गोलू और उरवलिया का सनी शामिल है. सनी अपनी बहन के घर दो दिन पहले ही आया था. वहीं, रेस्क्यू किए गए कल्लू और पवन कांशीराम आवास कॉलोनी के ही रहने वाले हैं. घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टर निरंतर अपनी नजर रखे हुए हैं.

हैरानी की बात यह है कि यह पानी की टंकी 26 सालों से बंद है और बेहद जर्जर स्थिति में है, बावजूद इसके वहां कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरा नहीं था. युवाओं का रील के प्रति यह अंधा जुनून समाज के लिए एक बड़ा सबक है. प्रशासन को भी ऐसी पुरानी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान रील के चक्कर में न जाए.