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Malegaon Blast: मालेगांव ब्लास्ट केस में CM योगी के खिलाफ हो रही थी बड़ी साजिश, फंसाने की थी पूरी प्लानिंग, गवाह ने तोड़ी चुप्पी

मामले के सरकारी गवाह मिलिंद जोशी ने बताया कि उनसे कहा गया था कि वे योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत का नाम केस में लें. इसके लिए उन्हें हिरासत में रखा गया और लगातार दबाव बनाया गया.

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Reepu Kumari

मालेगांव बम धमाके मामले में अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है. सरकारी गवाह रहे एक शख्स ने दावा किया है कि उससे योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसे बड़े नेताओं का नाम लेने का दबाव बनाया गया था. गवाह का कहना है कि उसे कई दिनों तक हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया गया ताकि वह भगवा नेताओं को इस केस में घसीट सके.

इससे पहले भी मालेगांव ब्लास्ट केस पर कई बार सवाल उठते रहे हैं. लेकिन अब गवाह की गवाही से साफ हो गया है कि कुछ लोगों को जानबूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही थी. कोर्ट ने भी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

जब भगवा आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई

मालेगांव धमाके को लेकर उस वक्त देशभर में भगवा आतंकवाद की चर्चा जोरों पर थी. लेकिन जैसे-जैसे कोर्ट में केस चला, एक-एक करके सच्चाई सामने आने लगी. मुंबई की विशेष अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं थे. इससे कांग्रेस और तत्कालीन सरकार की मंशा पर भी सवाल उठे.

गवाह ने बताया कैसे बनाया गया दबाव

मामले के सरकारी गवाह मिलिंद जोशी ने बताया कि उनसे कहा गया था कि वे योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत का नाम केस में लें. इसके लिए उन्हें हिरासत में रखा गया और लगातार दबाव बनाया गया. जांच अधिकारियों ने उन्हें असीमानंद का नाम लेने के लिए भी मजबूर किया. यह सब एक तयशुदा स्क्रिप्ट की तरह लग रहा था, जिसका मकसद सिर्फ हिंदुत्व नेताओं को बदनाम करना था.

कोर्ट का फैसला और मालेगांव धमाका

29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीकू चौक पर धमाका हुआ था जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी. जांच के दौरान एक बाइक बरामद हुई, जिसकी नंबर प्लेट में छेड़छाड़ की गई थी. बाद में नंबर प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड निकला. इस केस में प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित और अन्य को आरोपी बनाया गया. लेकिन कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कहानियों से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, पुख्ता सबूत चाहिए, जो पेश नहीं किए गए.