menu-icon
India Daily

पड़ोसी बुजुर्ग महिला की हत्या करने के बाद शव को टुकड़ों में काटा, कट्टे में भरकर, जानें दपंति ने क्यों किया ये घिनौना काम

राजस्थान के सलूंबर में 75 वर्षीय झमकू बाई की हत्या कर शव के टुकड़े कट्टे में फेंकने वाले दंपती महेंद्र और सीमा कलाल को अदालत ने आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

Anubhaw Mani Tripathi
पड़ोसी बुजुर्ग महिला की हत्या करने के बाद शव को टुकड़ों में काटा, कट्टे में भरकर, जानें दपंति ने क्यों किया ये घिनौना काम
Courtesy: Credit : AI

राजस्थान: राजस्थान के सलूंबर जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. सवा पांच साल पहले वृद्धा की निर्मम हत्या कर उसके शव के टुकड़े कर कट्टे में फेंकने वाले दंपती को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने इसे अत्यंत जघन्य अपराध बताते हुए आरोपियों पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया.

यह मामला सलूंबर जिले के झल्लारा थाना क्षेत्र के खोलडी गांव का है, जहां 24 जुलाई 2020 को 75 वर्षीय वृद्धा झमकू बाई गाड़िया लोहार की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. वह अपने पड़ोसी महेंद्र कलाल से उधारी के पैसे मांगने उसके घर गई थी, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी.

परिवार के सदस्यों ने काफी तलाश की, लेकिन झमकू बाई का कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन यानी 25 जुलाई 2020 को नौखली-समोडा रोड के पास प्लास्टिक के कट्टे में महिला के शव के टुकड़े बरामद हुए. शव की पहचान मृतका के बेटों ने की. पुलिस ने तत्काल हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

जांच में सामने आया कि आरोपी दंपती महेंद्र कलाल और उसकी पत्नी सीमा कलाल ने वृद्धा की हत्या गहने लूटने के इरादे से की थी. हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें कट्टे में भरकर फेंक दिया गया, ताकि पहचान छिपाई जा सके.

अदालत में सुनवाई

मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय सलूंबर में न्यायाधीश रामेश्वर प्रसाद चौधरी के न्यायालय में हुई. अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक रणजीत पूर्बिया और अपर लोक अभियोजक नाहर सिंह चुंडावत ने मामले में 34 दस्तावेज़ और 21 गवाह पेश किए. सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई. अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध अत्यंत निर्मम और अमानवीय है, जिसमें एक निर्दोष वृद्धा पर क्रूर अत्याचार कर उसकी हत्या की गई.

अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाले हैं और यह फैसला न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने वाला है. अदालत ने निर्देश दिया कि दंड की राशि न भरने पर आरोपियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. यह फैसला समाज को यह संदेश देता है कि किसी भी प्रकार के लोभ, लालच या अपराध के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है. पांच साल से अधिक की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.