दिल्ली की हवा एक बार फिर जहर उगल रही है. जहरीले स्मॉग के बीच अब पुलिस सेवा के पूर्व शीर्ष अधिकारी भी इसकी चपेट में आ गए हैं. जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बताया कि दिल्ली में महज 15 दिन रहने से ही उनका पूरा परिवार बीमार हो गया. उन्होंने लिखा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो “हजार सिगरेट” पी ली हों. इस बयान ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है.
वैद ने अपने पोस्ट में लिखा कि दिल्ली में 15 दिन रहने के बाद उन्हें और उनके परिवार को गले में तेज दर्द, नाक से पानी और लगातार जलन जैसी समस्याएं हुईं. उन्होंने कहा कि जो लोग सालभर यहां रहते हैं, उनका हाल इससे भी खराब होगा. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह हालात बेहद खतरनाक हैं.
My family and I returned to Jammu today after spending 15 days in New Delhi and we are all in bad shape. Severe throat pain, running noses, and a constant burning sensation as if we’ve inhaled a thousand cigarettes. If this is what short-term visitors experience, imagine the…
— Shesh Paul Vaid (@spvaid) November 9, 2025Also Read
पूर्व डीजीपी ने सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और दिल्ली सरकार से इस स्थिति को ‘मानवीय संकट’ घोषित करने और तत्काल कदम उठाने की अपील की. उन्होंने सवाल उठाया, “अगर यह संकट उन्हें झकझोर नहीं सकता, तो क्या करेगा? दिल्ली को कब तक गैस चेंबर बने रहने दिया जाएगा?”
सोमवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 346 दर्ज किया गया, जो रविवार के 391 से थोड़ा बेहतर है, लेकिन अब भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है. अक्टूबर मध्य से दिल्ली की हवा लगातार इसी श्रेणी में बनी हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से दिल्ली के कुल प्रदूषण में करीब 5% योगदान है.
बिगड़ती वायु गुणवत्ता के चलते दिल्ली के कई स्कूलों ने आउटडोर एक्टिविटीज़ पर रोक लगा दी है. मॉर्निंग असेंबली, पीटी और खेल सत्र अब इनडोर हो रहे हैं. कुछ स्कूलों ने क्लासरूम में एयर प्यूरीफायर भी लगाए हैं. सरकार ने ‘विंटर एक्शन प्लान’ के तहत स्कूलों को बच्चों की एक्सपोजर लिमिट करने और हवा की निगरानी के निर्देश दिए हैं.
रविवार को इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में लोग प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे. इनमें पैरेंट्स और बच्चे भी शामिल थे. पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन खंडारी ने कहा, “हम अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से जवाब चाहते हैं. मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की लेकिन अनुमति नहीं मिली. बच्चे बीमार हो रहे हैं, अब कार्रवाई जरूरी है.”