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क्या है 'लैंड फॉर जॉब' घोटाला, जिसमें लालू यादव पर चलेगा मुकदमा; जानिए पूरा मामला?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'लैंड फॉर जॉब' घोटाले में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी. आरोप है कि रेलवे में भर्ती के बदले लोगों से जमीन ली गई और मनी लॉन्ड्रिंग की गई.

ANI
Kuldeep Sharma

पटना: लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला फिर से सुर्खियों में है. यूपीए 1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू पर नौकरी देने के बदले लोगों से जमीन लेने और 600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मामले में लालू और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. CBI और ED अब पूरी जांच में जुट गए हैं.

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?

‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला यूपीए 1 सरकार (2004-2009) के दौरान हुआ था. आरोप है कि लालू ने रेलवे में ग्रुप डी की भर्तियों में धांधली की. नौकरी देने के बदले उन्होंने कई लोगों से जमीन हासिल की. इस घोटाले में जमीन की कुल कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये बताई गई है.

लालू परिवार पर आरोप

लालू प्रसाद यादव के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव भी आरोपी हैं. CBI का आरोप है कि नौकरी दिलाने के बदले जमीनें उनके नाम या परिवार के नाम पर ट्रांसफर की गईं. इस तरह यह पूरा मामला परिवारिक संपत्ति और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

कैसे खुला मामला

घोटाला तब सामने आया जब CBI और ED ने रेलवे भर्ती की प्रक्रिया की जांच शुरू की. रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ जमीनें वास्तविक कीमत से बहुत कम कीमत पर लालू परिवार के नाम की गईं. उदाहरण के लिए, 4 करोड़ रुपये की जमीन केवल 26 लाख रुपये में परिवार ने हासिल की.

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ED की चार्जशीट में लालू परिवार पर 600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. जमीन और नौकरी का यह गुप्त लेन-देन लंबे समय तक चला और अधिकारियों द्वारा इसकी जांच की गई. जांच में यह भी सामने आया कि बिहार के ही कई लोगों को भर्ती के तहत लाभ पहुंचाया गया.

कानूनी प्रक्रिया और प्रभाव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धारा 197(1) और संबंधित कानून के तहत लालू और परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी. अब CBI और ED इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रहे हैं. भविष्य में कोर्ट की प्रक्रिया न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक दिशा को भी तय करेगी.