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अपहरण के बाद CM हाउस में होता था सेटलमेंट: लालू के साले के बयान से बिहार की सियासत में मची खलबली

लालू यादव के साले सुभाष यादव ने आरोप लगाया कि लालू यादव अपने मुख्यमंत्री काल में एवं जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं, तब वो मुख्यमंत्री आवास में अपराधियों को संरक्षण देते थे.

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Anvi Shukla

बिहार की सियासत में उस समय हड़कंप मच गया, जब राजद प्रमुख लालू यादव के साले, जो खुद भी एक प्रमुख नेता हैं, ने एक विवादित बयान दिया. उनके इस बयान ने बिहार के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अपहरण के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री के कार्यालय (CM हाउस) में सेटलमेंट होता था. इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में तूफान आ गया है, और विपक्षी दलों ने इसे गंभीर आरोप के रूप में लिया है.

लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल में लालू यादव के सबसे करीब रहने वाले राबड़ी देवी के भाई ने लालू यादव पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा कि उस समय बिहार में होने वाले अपहरण के बाद फिरौती की राशि सीएम हाउस से ही तय होती थी.

लालू के साले का विवादित बयान:

लालू यादव के साले ने हाल ही में कहा, "बिहार में अपहरण की घटनाएं पहले आम थीं और जब कोई अपहरण होता था, तो उसे मुख्यमंत्री हाउस में बैठकर सुलझाया जाता था." उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया, क्योंकि इससे यह इशारा मिलता है कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के कार्यालय में अपहरण जैसे संगीन मामलों को सुलझाने के लिए एक प्रकार का 'व्यापार' चलता था.

राजनीतिक प्रतिक्रिया:

लालू यादव के साले के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विपक्षी पार्टी बीजेपी ने इस आरोप को लेकर बिहार सरकार पर जमकर हमला बोला है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान से यह साबित होता है कि बिहार में आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया था और सरकारी संरक्षण में अपराधियों के साथ सौदेबाजी होती थी.

बीजेपी नेता ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री हाउस में अपहरण की घटनाओं को सेटल करने की बात सच है, तो यह बिहार के लिए शर्मनाक है. इस मुद्दे की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए."

राजद का बचाव:

वहीं, राजद ने लालू के साले के बयान को खारिज किया है. पार्टी के प्रवक्ता ने इसे एक राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा, "इस तरह के आरोपों से हमारी पार्टी और हमारे नेता की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. यह बयान पूरी तरह से आधारहीन है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है."

राजद का कहना है कि उनके नेता हमेशा से बिहार के विकास और जनता की भलाई के लिए काम करते रहे हैं, और इस प्रकार के आरोप केवल राजनीतिक चालों का हिस्सा हैं.

राजनीतिक माहौल पर असर:

लालू के साले के इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई खलबली मचा दी है. जहां एक तरफ विपक्षी दल इस बयान को एक गंभीर आरोप मान रहे हैं, वहीं राजद इसे महज एक झूठा आरोप बता रहा है. अब देखना यह होगा कि क्या इस बयान का असर आगामी चुनावों पर पड़ेगा, और बिहार की सियासत में कौन सी नई दिशा सामने आती है.

लालू यादव के साले के विवादित बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है, जबकि राजद ने इसे सिरे से नकारा है. अब इस मामले की सच्चाई क्या है, यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की सियासत में एक नई हलचल शुरू हो चुकी है.