पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ रहे हैं और अब तक के जो रुझान हैं, उससे 'लालटेन' का बुझना तय कर दिया है. नीतीश ने अपने 'तीर' से ऐसा निशाना साधा है कि पूरा बिहार भगवामय होता नजर आ रहा है. बिहार के चुनावी रण में जिस तरह से 'कमल' खिला है, उससे बिहार बीजेपी को अब फ्रंट फुट पर खेलने के लिए आत्मविश्वास मिलेगा, ऐसा विश्लेषकों का मानना है.
लंबे समय से रुझानों में आगे चल रहा NDA निश्चित रूप से इन रुझानों को अंतिम परिणामों में तब्दील करेगा और ये नतीजे कई मायनों में बीजेपी और जदयू की नेतृत्व वाली NDA के लिए संजीवनी से कम नहीं है. NDA गठबंधन 200 सीटों पर आगे है, जबकि RJD नीत महागठबंधन सिर्फ 36 सीटों पर बढ़त बनाए हुई है. बता दें कि ये नतीजे 2010 में NDA गठबंधन को मिले जनादेश से भी बड़ा होता नजर आ रहा है.
साल 2010 में जदयू ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और दोनों ही पार्टियों का प्रदर्शन शानदार रहा था. ये वह समय था, जब बिहार में जदयू 'बड़े भाई' की भूमिका में हुआ करती थी. 2010 में जदयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिनमें 115 पर जीत दर्ज की थी. भाजपा ने 102 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और 91 पर जीत हासिल की थी. ये लगातार दूसरी बार था, जब नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था.
साल 2010 में आरजेडी ने 168 सीटों पर चुनाव लड़ा और महज 22 पर जीत हासिल हुई. लोक जनशक्ति पार्टी ने 75 सीटों पर अपने उम्मीदवार थे, लेकिन 3 सीटों पर ही जीत मिल सकी. कांग्रेस ने अकेले डैम पर चुनाव लड़ा था और सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन, उसे सिर्फ चार सीटों पर ही जीत मिली. इस तरह साल 2010 में RJD को करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसी चुनाव ने बिहार में कांग्रेस के खत्म होते जनाधार पर भी मुहर लगा दी थी.
इस साल के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन ही मुकाबला देखने को मिला. NDA में जहां भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को मिलाकर पांच दल शामिल हैं. वहीं, महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी के अलावा तीन वामपंथी दल- सीपीआईएमएल, सीपीएम और सीपीआई जैसी पार्टियां शामिल है. NDA में पांच और महागठबंधन में छह पार्टियां शामिल हैं.