Bihar Elections 2025: गुजरात की तरह बिहार में BJP का 'सेम-टू-सेम' फेरबदल का प्लान, क्या नए चेहरों को मिलेगा टिकट?
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है, लेकिन भाजपा को एनडीए गठबंधन में अपनी सीटों को बढ़ाने के लिए मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने में दिक्कत हो सकती है. 2020 में भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में 80 सीटें जीती थीं, लेकिन अब सत्ता विरोधी लहर के दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है, लेकिन BJP को एनडीए गठबंधन के भीतर अपनी सीटें बढ़ाने के लिए अपने मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. इस बार भाजपा सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है.
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद, 80 विधायकों के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी. हालांकि, वह RJD से कुछ सीटें ही आगे थी. अब आगामी चुनावों में भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है, जो पार्टी के लिए एक बड़ा चुनौती साबित हो सकता है.
भाजपा की उम्मीद
बिहार में सत्ता की बागडोर नीतीश कुमार के हाथों में है और एनडीए इस बार उनके नेतृत्व में पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की उम्मीद जताने की कोशिश कर रहा है. भाजपा को उम्मीद है कि हाल ही में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा घोषित नई योजनाओं और कार्यक्रमों से पार्टी को फायदा होगा और चुनावी समीकरण उनके पक्ष में बनेंगे.
पुराने चेहरों को बदलने का प्रयास
हालांकि, पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पुराने चेहरों को बदलने का प्रयास करना चाहती है, लेकिन जमीन पर इसका असर कितना होगा, यह साफ नहीं है. भाजपा के लिए यह स्थिति जटिल है, क्योंकि मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है.
गुजरात विधानसभा चुनाव (2022)
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव (2022) की तर्ज पर एक बड़ा फेरबदल करने की योजना बनाई है. गुजरात में भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने के लिए अपने मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव किया था और 45 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया था. अब पार्टी बिहार में भी ऐसी ही रणनीति अपनाने पर विचार कर रही है, ताकि सत्ता विरोधी लहर से निपटा जा सके और भाजपा के लिए चुनावी समीकरण को अपनी ओर मोड़ा जा सके.
आखिरकार, भाजपा के लिए सवाल यह है कि क्या वह पुराने चेहरों को फिर से मैदान में उतारेगी, या फिर नई उम्मीदों के साथ नए चेहरे चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी करेगी.
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