menu-icon
India Daily

PoK में खूनी खेल के बाद इस्लामाबाद में पत्रकारों पर हमला! शहबाज सरकार की 'काली करतूत' आई सामने

Pakistan Police attack in Islamabad Press Club: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे और इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग की. ऐसे में इस घटना को लेकर इस्लामाबाद में पीओके के सामाजिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने हमला कर दिया और प्रेस क्लब में तोड़फोड़ की.

mishra
PoK में खूनी खेल के बाद इस्लामाबाद में पत्रकारों पर हमला! शहबाज सरकार की 'काली करतूत' आई सामने
Courtesy: X

Pakistan Police attack in Islamabad Press Club: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सेना की सख्ती और हिंसा ने लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया है. हाल ही में वहां हुई गोलीबारी में कई लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए. अब इस गुस्से को दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. इस्लामाबाद के प्रेस क्लब में हुई हिंसक घटना ने दुनिया का ध्यान खींचा है, जहां पुलिस ने पत्रकारों पर हमला किया और प्रेस क्लब में तोड़फोड़ की.

इस्लामाबाद के प्रेस क्लब में उस समय डरावना माहौल बन गया, जब पुलिस बल ने वहां मौजूद पत्रकारों और PoK से आए कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में पुलिस को प्रेस क्लब के अंदर तोड़फोड़ करते और पत्रकारों को पीटते देखा गया. कई पत्रकार और कार्यकर्ता इस हमले में घायल हो गए. बताया जा रहा है कि पत्रकार PoK में सेना की कार्रवाई और वहां के लोगों के साथ हो रहे अन्याय को उजागर कर रहे थे.

PoK में सेना की कार्रवाई

PoK में पिछले कुछ समय से हालात तनावपूर्ण हैं. स्थानीय लोग सेना की सख्ती और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं. प्रदर्शनों के दौरान सेना की गोलीबारी में कई लोगों की मौत हो चुकी है. लोग आरोप लगा रहे हैं कि सेना न सिर्फ प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है बल्कि उनकी आवाज उठाने वालों को भी डराने की कोशिश कर रही है. इस बीच पत्रकारों पर हमला इस बात का संकेत है कि सरकार सच को सामने आने से रोकना चाहती है.

प्रेस की आजादी पर सवाल

पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है. इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर हमले ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है. पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. आयोग ने कहा कि पत्रकारों पर हमला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है. उन्होंने इस मामले की तुरंत जांच और दोषियों को सजा देने की मांग की है.

अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को और कमजोर करेंगी. प्रेस क्लब जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पर हमला यह दिखाता है कि देश में न तो पत्रकार सुरक्षित हैं और न ही आम नागरिक. PoK में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन पहले ही वैश्विक मंचों पर चर्चा का विषय हैं. अब प्रेस पर हमले ने पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.