Assembly Election 2026 West Bengal Assembly Election 2026

हर बार से अलग रहा इस बार का पश्चिम बंगाल चुनाव, क्या नतीजों पर भी दिखेगा इसका असर?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में कुछ घंटों का समय रहा है. हालांकि इस बार के चुनाव से काफी अलग रहा है. जिसके बार में हम यहां जानेंगे.

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Shanu Sharma

4 मई 2026, सोमवार के दिन इंतजार खत्म होने वाला है. इसी के साथ लगभग डेढ़ महीने से पांच राज्य की विधानसभाओं में चल रही लंबी चुनावी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी. हालांकि इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल को लेकर है.

लोगों के मन में सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या इस बार फिर से तृणमूल कांग्रेस यानी ममता सरकार चौथी बार सत्ता में वापसी करेंगी या फिर पहली बार भारतीय जनता पार्टी राज्य में जीत का झंडा गाड़ने वाली है.

पहली बार दो पार्टियों में कड़ी टक्कर 

पश्चिम बंगाल में दोनों चरण के मतदान पूरे होने के बाद, एग्जिट पोल भी आ चुका है. जिसके मुताबिक इस बार बंगाल बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है. इसी के साथ 50 साल बाद ऐसा हो रहा है जब मुकाबला दो तरफा नजर आ रहा हो.

इससे पहले हमेशा से एक ही पार्टी को पूरा समर्थन मिलता रहा है, जिसमें टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट की पार्टी रही है. हालांकि इस बार बीजेपी बंगाल में सभी पुराने स्टाइल को भेदती नजर आ रही है. जिसका असर चुनाव के नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है. 

शांती से पूरे हुए चुनाव 

इस बार पश्चिम बंगाल में चल रहा विधानसभा चुनाव हर बार से काफी अलग है. ऐसी कई बातें और एक्शन हैं, जिन्होंने इस चुनाव को काफी खास बना दिया. जिसे देख कर खुद राज्य की जनता भी हैरान है. तो चलिए जानते हैं कि इस चुनाव क्या अलग और खास हुआ. सबसे पहली औरप बड़ी इस बार चुनाव के दौरान या बाद कोई भी बड़ी राजनीतिक हिंसा नहीं हुई.

हर बार चुनाव के आसपास हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती थी. लेकिन इस बार चुनाव काफी शांती से हुई.इसके लिए मतदान बूथ और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की पूरी तैयारी की गई. ऐसा हो पाना इसलिए भी संभव हुआ क्योंकि पहले चरण के मतदान के बाद दूसरी बार चुनाव आयोग ने एक भी बूथ पर दोबारा वोटिंग कराने के आदेश नहीं दिए. इस खास वजह से बूथों पर कोई भी अशांति की खबर नहीं मिली.

बढ़-चढ़ कर मतदाताओं ने लिया हिस्सा

इस चुनाव की दूसरी सबसे खास बात मतदाताओं की रूची रही. यानी लोगों ने भी इस बार मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. जिसका नतीजा यह हुआ कि आजादी के बाद पहली बार इस राज्य में 92 प्रतिशत से भी अधिक मतदान डाले गए. शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में मतदाताओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया.

ऐसा इसलिए भी शायद संभव हो पाया क्योंकि इस बार राज्य में शांति से चुनाव हुए. कोई भी हिंसा की बड़ी घटना नहीं घटी. माना जाता है कि अगर वोटिंग ज्यादा होती है तो जनता के अंदर सत्ताविरोधी भावना बढ़ी हुई है. क्या इस बार भी ऐसा होगा, इसके बारे में जानकारी कल ही मिल सकती है.

परंपराओं को तोड़कर, नए स्टाइल में प्रचार

बीजेपी जहां भी चुनाव लड़ती है, वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार करने जाते हैं, लेकिन फिर वापस राष्ट्रीय राजधानी लौट जाते हैं. इस बार उन्होंने इस परंपरा को तोड़ते हुए राज्य में ठहरने का फैसला लिया. उनके साथ-साथ इस बार खुद गृहमंत्री अमित शाह चुनाव में काफी एक्टिव रहें. उन्होंने सुरक्षा की तैयारी में कई नियमों में बदलाव किया. इसके अलावा प्रचार के लिए जमीन पर भी उतरें. 

बंगाल की संस्कृति पर जोर

पश्चिम बंगाल के लोग अपनी स्थानीय संस्कृति, भाषा और खान-पान की आदतों को लेकर काफी सेंसिटिव रहे हैं. जिसका फायदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मिलता रहा है. सीएम बनर्जी खुद को बंगाल की बेटी के रूप में पेश करती रही हैं और उन्होंने हमेशा दावा किया है कि वह बंगाली संस्कृति की रक्षा के लिए सबसे बेस्ट हैं. लेकिन इस बार बीजेपी ने 'बंगाली अस्मिता' पर जोर दिया.

इसके लिए उन्होंने मछुआरे के साथ भी समय बिताया. बीजेपी की ओर से अन्य नेताओं ने भी खुद को बंगाल से जोड़ने पर जोड़ दिया. इन सभी मायनों से इस बार का चुनाव हर बार से काफी अलग रहा है. अब 24 घंटे से भी कम समय में इसके नतीजे लोगों के सामने आने शुरू हो जाएंगे.