8 मैचों में 3 हार के साथ अभी से ही WTC फाइनल के रेस से बाहर हुई टीम इंडिया! जानें पूरा समीकरण
भारतीय टीम को कोलकाता टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा. इसके साथ टीम इंडिया पर WTC फाइनल से बाहर का खतरा मंडराने लगा है. आइए जानते हैं कि भारत का क्या पूरा समीकरण है.
नई दिल्ली: कोलकाता टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें बढ़ गई हैं. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) के मौजूदा साइकिल में शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने अभी तक 8 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से सिर्फ 4 में जीत मिली, 3 में हार और 1 ड्रॉ रहा.
इस प्रदर्शन के कारण टीम का पॉइंट परसेंटेज (PCT) अभी करीब 54% के आसपास है, जो फाइनल की रेस में बहुत कम है. ऐसे में अब भारत पर मौजूदा चरण के लिए फाइनल में क्वालीफाई करना मुश्किल होता जा रहा है.
अभी टीम इंडिया की स्थिति
- खेले- 8 टेस्ट
- जीते- 4
- हारे- 3
- ड्रॉ- 1
- मौजूदा PCT- लगभग 54%
- कुल मैच इस साइकिल में- 18 (यानी बचे हैं 10 टेस्ट)
बचे हुए 10 टेस्ट मैच
- साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज- 1 टेस्ट (गुवाहाटी)
- श्रीलंका के खिलाफ विदेशी सीरीज- 2 टेस्ट
- न्यूजीलैंड के खिलाफ विदेशी सीरीज- 2 टेस्ट
- ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज- 5 टेस्ट (बॉर्डर-गावस्कर सीरीज)
अब कितनी जीत चाहिए?
पहले तीन WTC साइकिल के फाइनल में पहुंचने वाली टीमों का PCT देखें तो आमतौर पर 64-70% के बीच रहा है. यानी भारत को फाइनल की मजबूत दावेदारी के लिए कम से कम 68-70% PCT चाहिए.
अब देखिए अलग-अलग परिणामों में भारत का फाइनल PCT क्या होगा-
- अगर बचे 10 में से सिर्फ 5 जीते- कुल अंक 112- PCT: 51.85% (बिल्कुल बाहर)
- 6 जीत- कुल अंक 124- PCT: 57.41% (लगभग नामुमकिन)
- 7 जीत- कुल अंक 136- PCT: 62.96% (बहुत मुश्किल, दूसरी टीमों पर निर्भर)
- 8 जीत- कुल अंक 148- PCT: 68.52% (हल्की उम्मीद लेकिन अभी भी रिस्क)
- 9 जीत- कुल अंक 160- PCT: 74.07% (मजबूत स्थिति)
- 10 जीत- कुल अंक 172- PCT: 79.63% (लगभग पक्का फाइनल)
मतलब साफ है कि भारत को बचे 10 में से कम से कम 8 से 9 टेस्ट जीतने ही होंगे. एक भी हार या ड्रॉ हुआ तो फाइनल का रास्ता लगभग बंद हो जाएगा.
पिछले साइकिल में फाइनलिस्ट टीमों का PCT
2019-21: भारत 72.2%, न्यूजीलैंड 70%
2021-23: ऑस्ट्रेलिया 66.7%, भारत 58.8%
2023-25: साउथ अफ्रीका 69.44%, ऑस्ट्रेलिया 67.54%
इतिहास बताता है कि 64% से नीचे रहने वाली टीम कभी फाइनल में नहीं पहुंची. सिवाय 2021-23 में भारत के, जब 58.8% पर भी पहुंच गए थे क्योंकि बाकी टीमें अच्छा खेल नहीं दिखा सकीं थीं.