रोजाना 6 घंटे से कम सो रहे हैं तो हो जाइए सावधान, वरना ये बीमारियां कर रही हैं आपका इंतजार

रोजाना 6 घंटे से कम नींद लेना सिर्फ थकान नहीं बढ़ाता बल्कि आपके पूरे शरीर पर गंभीर असर डालता है. विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम नींद से रक्तचाप, शुगर और हृदय की सेहत प्रभावित हो सकती है.

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Kuldeep Sharma

स्वस्थ जीवन के लिए नींद उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना संतुलित आहार और व्यायाम. विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 6 घंटे से कम सोता है, तो इसके कई गंभीर नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं. आधुनिक जीवनशैली, स्मार्टफोन और टीवी के अत्यधिक इस्तेमाल ने नींद की अवधि और गुणवत्ता को प्रभावित किया है.

न्यूरोलॉजिस्ट और पल्मोनोलॉजिस्ट की राय के अनुसार, नींद की कमी से शरीर और मस्तिष्क दोनों प्रभावित होते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

नींद और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर

डॉक्टर मधुकर भारद्वाज के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से शरीर के कई मापदंड जैसे रक्तचाप और शुगर असंतुलित हो सकते हैं. मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है, जिससे मानसिक थकान, ध्यान में कमी और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. युवाओं में हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा भी नींद की कमी और तनाव से जुड़ा हुआ है. कम नींद सीधे तौर पर शरीर के इम्यून सिस्टम और हृदय स्वास्थ्य को कमजोर करती है.

बुजुर्गों की नींद और स्वास्थ्य

बहुत से लोग सोचते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ नींद की जरूरत कम हो जाती है. डॉक्टर भारद्वाज बताते हैं कि आवश्यकता उतनी ही रहती है, लेकिन शरीर गहरी नींद लेने में असमर्थ हो जाता है. 70 वर्ष के व्यक्ति को भी लगभग 7-8 घंटे की नींद की जरूरत होती है. डॉ. सुष्रुत गणपुले बताते हैं कि बुजुर्गों का मस्तिष्क पर्याप्त नींद हार्मोन नहीं बना पाता, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है.

नींद का असर शरीर के अंगों पर

नींद की कमी से प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, हृदय पर दबाव बढ़ता है और पाचन प्रणाली भी प्रभावित होती है. डॉ. गणपुले ने बताया कि उन्होंने कई मरीजों को बेहतर नींद के जरिए ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित होते देखा है. नींद शरीर के लिए सबसे सस्ती और प्रभावी दवा है, जो हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों को स्वस्थ बनाए रखती है.

विशेष मामलों और दिन की झपकी

कुछ लोग, जैसे साधु-संत, कम नींद में भी सक्रिय रहते हैं, लेकिन ये बहुत कम अपवाद हैं. बाकी लोगों के लिए 6 घंटे से कम नींद हानिकारक है. दिन में छोटी झपकी ऊर्जा बढ़ा सकती है, लेकिन यह रात की नींद की जगह नहीं ले सकती. रात की नींद मस्तिष्क की सफाई और शरीर की मरम्मत के लिए जरूरी है, इसलिए इसे छोड़ना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है.

मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक प्रदर्शन पर असर

नींद की कमी लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है. यह चिंता, अवसाद और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकती है. नींद की कमी से ध्यान, सीखने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है. साथ ही, दैनिक कार्यों में उत्पादकता और प्रतिक्रिया समय प्रभावित होता है, जिससे कामकाज कठिन हो जाता है. नियमित और पर्याप्त नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए अनिवार्य है.