menu-icon
India Daily

इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए राजी हुए यूएस और ईरान, सीजफायर खत्म होने से पहले दोनों देशों में बनी बात!

वार्ता पाकिस्तान की राजधानी में होने वाली है, जहां दोनों पक्ष शांति बहाल करने पर चर्चा करेंगे. अधिकारियों के अनुसार, बातचीत में क्षेत्रीय स्थिरता और तेल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर फोकस रहेगा.

KanhaiyaaZee
इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए राजी हुए यूएस और ईरान, सीजफायर खत्म होने से पहले दोनों देशों में बनी बात!
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी खूनी संघर्ष के बीच शांति की एक धुंधली किरण दिखाई दे रही है. खबर है कि अमेरिका और ईरान एक बार फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की मेज पर लौट रहे हैं. 14 दिनों का अस्थाई संघर्ष विराम बुधवार को समाप्त हो रहा है, जिससे कूटनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ गई है. पाकिस्तान के अधिकारी जेडी वेंस और मोहम्मद बाघर कलीबाफ के आने का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर फिलहाल चुप्पी साधी हुई है.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान पर संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन का आरोप लगाया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो भीषण बमबारी शुरू हो जाएगी. दूसरी तरफ, ईरानी संसद के अध्यक्ष कलीबाफ ने स्पष्ट किया है कि वे धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेंगे. उन्होंने इस कूटनीतिक मेज को 'आत्मसमर्पण की मेज' मानने से इनकार कर दिया है और युद्ध के मैदान में अपने 'नए कार्ड' खेलने की तैयारी दिखाई है.

इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय हलचल

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के मध्यस्थों को पुष्टि मिली है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार बुधवार तड़के इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं. हालांकि, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (IRIB) ने अभी तक ऐसी किसी भी आधिकारिक यात्रा से साफ इनकार किया है. पर्दे के पीछे की इस कूटनीति में असली पेच यह है कि कोई भी पक्ष सार्वजनिक रूप से पहले झुकने को तैयार नहीं है. पाकिस्तान के लिए यह वार्ता कूटनीतिक अग्निपरीक्षा है.

युद्ध की विभीषिका और मानवीय नुकसान

इस जंग ने अब तक हजारों मासूम जिंदगियां निगल ली हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 3,375 और लेबनान में 2,290 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. इजरायल और खाड़ी देशों में भी दर्जनों मौतें हुई हैं, जिनमें कई सैनिक शामिल हैं. इन आंकड़ों की भयावहता ही शांति वार्ता की तात्कालिकता को दर्शाती है. यदि बुधवार की समय सीमा बिना किसी नतीजे के बीत गई, तो हताहतों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी होने का अंदेशा है जिससे पूरा क्षेत्र अस्थिर होगा.

ईरान की रणनीति और 'ग्रीन लाइट'

एक हालिया रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है. खबर है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने अपनी टीम को इस्लामाबाद जाने के लिए कूटनीतिक 'हरी झंडी' दे दी है. यह संकेत देता है कि कड़े बयानों के बावजूद ईरान बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है. हालांकि, पिछली बार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षा खतरों की शिकायत की थी, जिसे देखते हुए इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं और रूट बदले गए हैं.

वैश्विक शांति के लिए अंतिम मौका

दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यह बैठक युद्ध रोकने का शायद अंतिम अवसर हो सकती है. ट्रंप के 'बम' बनाम ईरान के 'नए पत्तों' के बीच का यह मुकाबला अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रह गया है. हकीकत में, अरब सागर की तस्वीरें और जमीनी तनाव कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. सबकी उम्मीद यही है कि बुधवार का सूरज मध्य पूर्व के लिए तबाही के बजाय किसी स्थाई समझौते और शांति का पैगाम लेकर आए.