menu-icon
India Daily

लेबनान-इजरायल में 33 साल बाद पहली बार शुरू हुई बातचीत, तनाव कम करने की उम्मीद

1993 के बाद पहली बार लेबनान और इजरायल के बीच सीधे कूटनीतिक वार्ता हुई. जिसकी मध्यस्थता खुद जंग लड़ रहा अमेरिका है. हालांकि इस बैठक में युद्धविराम पर बातचीत की गई.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
लेबनान-इजरायल में 33 साल बाद पहली बार शुरू हुई बातचीत, तनाव कम करने की उम्मीद
Courtesy: IG (Ayman Mat 🇰🇼)

पश्चिम एशिया में उभरते तनाव के बीच लेबनान और इजरायल ने कई सालों के अंतराल के बाद पहली बार सीधे कूटनीतिक वार्ता शुरू की है. अमेरिकी राजधानी में मंगलवार को हुई त्रिपक्षीय बैठक को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया है, हालांकि प्रमुख मुद्दों पर अभी भी मतभेद बरकरार हैं. यह 1993 के बाद पहला मौका है जब तीनों देश इतने उच्चस्तरीय बैठक में एक साथ आए हैं.

अमेरिका की मेजबानी में हुई इस बैठक में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोअवाद और इजरायल के राजदूत येचिएल लाइटर ने हिस्सा लिया. बैठक के बाद लेबनानी राजदूत ने इसे रचनात्मक करार दिया और कहा कि अगले दौर की बैठक के बारे में उचित समय पर जानकारी साझा की जाएगी. उन्होंने तत्काल युद्धविराम और विस्थापित लोगों की घर वापसी पर जोर देते हुए मानवीय संकट को कम करने की अपील की.

बैठक के बाद क्या बोले दोनों देश के राजदूत?

मोअवाद ने कहा कि चल रहे संघर्ष के कारण लेबनान जिस गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है, उसे कम करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने नवंबर 2024 में घोषित शत्रुता समाप्ति समझौते के पूर्ण पालन की मांग दोहराई और लेबनान की संप्रभुता तथा सुरक्षा के रुख पर जोर दिया. राजदूत ने अमेरिका की इस बैठक को संभव बनाने के प्रयासों की सराहना भी की. इजरायली राजदूत येचिएल लाइटर ने बैठक को दो घंटे की शानदार बातचीत बताया. उन्होंने युद्धविराम पर सीधे टिप्पणी से परहेज करते हुए कहा कि उनका मुख्य ध्यान इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है. लाइटर के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान सबसे जरूरी है. 

क्या है लेबनान की मुख्य मांग? 

विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने की दिशा में एक छोटा लेकिन सकारात्मक कदम उठाया गया है. लेबनान की मुख्य मांग युद्धविराम और विस्थापितों की वापसी है, जबकि इजरायल दक्षिणी लेबनान से हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और अपनी सीमा सुरक्षा पर जोर दे रहा है. अमेरिकी मध्यस्थता में हुई यह वार्ता भविष्य में व्यापक शांति समझौते की नींव रख सकती है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद अभी भी चुनौती बने हुए हैं.