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रूस पर और बढ़ेगा दबाव... कीव में मोदी और जेलेंस्की की मुलाकात पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या लिखा?

PM Modi Ukraine Visit Update: यूक्रेन की राजधानी कीव में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी. दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद इंटरनेशनल मीडिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी. 1992 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली यूक्रेन यात्रा है.

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रूस पर और बढ़ेगा दबाव... कीव में मोदी और जेलेंस्की की मुलाकात पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या लिखा?
Courtesy: social media

PM Modi Ukraine Visit Update: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कीव की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बैठक की. बैठक में यूक्रेन में शांति लाने में मदद करने के लिए मोदी ने भारत की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. पीएम मोदी के आश्वासन के बाद जंग से जूझ रहे यूक्रेन के लोगों को उम्मीद है कि शांति मध्यस्थता में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. म़ॉर्डन यूक्रेन में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा ऐसे वक्त में हुई है, जब फरवरी 2022 से जंग से जूझ रहा यूक्रेन धीरे-धीरे ही सही रूस पर दबाव बना रहा है.  

यूक्रेन की राजधानी कीव में पीएम मोदी के पहुंचने से लेकर राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ मीटिंग तक पर इंटरनेशनल मीडिया की नजरें टिकीं रहीं. संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका की ओर से उम्मीद जताई गई है कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो दोनों देशों के बीच जारी जंग को रूकवा सकता है. आइए, जानते हैं कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुलाकात पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा- तस्वीरें मिलती-जुलती हैं

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने खबर दी कि कीव से जो तस्वीरें आईं हैं, वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले महीने की मास्को यात्रा से काफी मिलती-जुलती है, जहां उन्होंने शांति की अपील की थी. पीएम मोदी ने मॉस्को में भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गले लगाया था. हालांकि, उस वक्त यूक्रेन ने पुतिन को गले लगाने की आलोचना की थी. जिस दिन जेलेंस्की ने पुतिन को गले लगाने की आलोचना की, उसी दिन यूक्रेन में रूसी मिसाइल से बच्चों के एक अस्पताल पर हमला हुआ था. 

बीबीसी ने लिखा- निश्चित रूप से ये कोई संयोग नहीं था

बीबीसी ने लिखा कि ये निश्चित रूप से कोई संयोग नहीं था कि शुक्रवार को पीएम मोदी को सबसे पहले यूक्रेन के म्यूजियम ले जाया गया, जहां उन्हें एक प्रदर्शनी दिखाया गया. प्रदर्शनी में फरवरी 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से मारे गए सभी 570 यूक्रेनी बच्चों को याद किया गया था.

प्रदर्शनी में जाने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि संघर्ष विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए विनाशकारी है. मेरी संवेदना उन बच्चों के परिवारों के साथ है जिन्होंने अपनी जान गंवा दी और मैं प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपना दुख सहने की शक्ति मिले. पीएम मोदी ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर में यूक्रेन के इतिहास के नेशनल म्यूजियम में स्मारक पर टेडी बियर रखे और उसके बाद एक क्षण का मौन रखा.

AP ने लिखा- अधिक तटस्थ रुख अपनाने का प्रयास भी हो सकता है

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने लिखा कि यूक्रेन की यात्रा मोदी की ओर से रूस के प्रति उनके झुकाव के बाद अधिक तटस्थ रुख अपनाने का प्रयास भी हो सकता है. डेढ़ महीने पहले जेलेंस्की ने मोदी को पुतिन से मुलाकात के दौरान गले लगाने के लिए भी फटकार लगाई थी. लेकिन शुक्रवार को ज़ेलेंस्की ने अपनी आलोचना को दरकिनार करते हुए मोदी को गले लगाया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक यूक्रेनी विश्लेषक ने कहा कि मोदी की पहली यात्रा का परिणाम मामूली रहने की संभावना है, क्योंकि ये भारत, यूक्रेन और यूरोप के बीच एक जटिल वार्ता की शुरुआत मात्र है. एपी ने अपने टेलीग्राम चैनल पर यूरी बोहदानोव के हवाले से कहा कि भारत के साथ संबंध स्थापित करना चुनौतीपूर्ण और लंबी प्रक्रिया होगी.

उन्होंने कहा कि यदि भारत शांति समझौते के लिए यूक्रेन के दृष्टिकोण का समर्थन करता है, तो इससे कीव को 'ग्लोबल साउथ' के अन्य देशों से अधिक समर्थन प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है, जहां प्रभाव के लिए भारत चीन का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बना हुआ है. बोहदानोव ने कहा कि इससे रूस पर दबाव और बढ़ेगा.

मोदी की यात्रा से पहले जेलेंस्की के कार्यालय ने लिखा- ये यात्रा महत्वपूर्ण है

इस यात्रा से पहले, ज़ेलेंस्की के कार्यालय में सलाहकार मिखाइलो पोडोल्यक ने रॉयटर्स को बताया कि ये यात्रा महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई दिल्ली का मॉस्को पर वास्तव में एक निश्चित प्रभाव है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए ऐसे देशों के साथ प्रभावी ढंग से संबंध बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि उन्हें समझाया जा सके कि युद्ध का सही अंत क्या है और यह उनके हित में भी है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख आंद्रेई यरमक ने कहा कि मोदी की यात्रा ऐतिहासिक थी और उन्होंने यूक्रेन की इस उम्मीद पर जोर दिया कि भारत न्यायपूर्ण शांति के साथ युद्ध को समाप्त करने में भूमिका निभा सकता है. उन्होंने यूक्रेन के शांति फार्मूले का भी जिक्र किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारतीय अधिकारियों के हवाले से क्या लिखा?

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि वे मध्यस्थता की भूमिका नहीं चाहते हैं, लेकिन अनुरोध किए जाने पर वे यूक्रेन और रूस के बीच संदेश पहुंचाएंगे. इसमें कहा गया है कि भारत पश्चिम में रूस को और अधिक अलग-थलग पड़ने से बचाने के लिए युद्ध के समाधान में रुचि रखता है.