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India Daily

'भारत का आखिरी युद्ध', खालिस्तानी आतंकी ने उगला जहर, पाकिस्तान के लिए लड़ने का ऐलान

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पन्नू ने एक भड़काऊ बयान जारी किया है. उसने दावा किया कि यदि भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई दिल्ली के लिए "आखिरी युद्ध" साबित होगा. 

Gyanendra Sharma
'भारत का आखिरी युद्ध', खालिस्तानी आतंकी ने उगला जहर, पाकिस्तान के लिए लड़ने का ऐलान
Courtesy: Social Media

खालिस्तानी आतंकी और सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पन्नू ने एक भड़काऊ बयान जारी किया है. उसने दावा किया कि यदि भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई दिल्ली के लिए "आखिरी युद्ध" साबित होगा. 

पन्नू ने भारत-पाकिस्तान युद्ध को पंजाब को भारत से अलग करने का एक मौका करार दिया है. यह बयान न केवल भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और सिख समुदाय की एकता के लिए भी गंभीर चुनौती पेश करता है.

एलओसी पर तनाव

22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाई के तौर पर सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर लगातार गोलीबारी की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में पन्नू का यह बयान भारत के खिलाफ पाकिस्तान की शह पर सिख समुदाय को भड़काने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

पन्नू का पाकिस्तान समर्थन और खालिस्तान का राग

पन्नू ने कहा कि पाकिस्तान को फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दो करोड़ सिख भारत और पाकिस्तान के बीच खड़े हैं. हम भारतीय सेना को पंजाब से होकर पाकिस्तान पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे. उसने यह भी दावा किया कि पहलगाम हमला भारत की अपनी साजिश थी, जिसका मकसद राजनीतिक लाभ और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना था. पन्नू ने पाकिस्तान की जनता और सरकार से खालिस्तान को मान्यता देने की शर्त रखी और सिख समुदाय को पाकिस्तान के साथ एकजुट होने का आह्वान किया.