'US-ईरान के बीच अविश्वास रातोंरात नहीं टूटेगा, पाकिस्तान में जल्द शुरू होंगी नई शांति वार्ताएं', जेडी वेंस का बड़ा बयान

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहरी अविश्वास की दीवार रातोंरात नहीं टूट सकती. पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत नाकाम रही लेकिन दोनों पक्ष समझौते की इच्छुक हैं. अगले दौर की वार्ता जल्द शुरू हो सकती है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेड वेंस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच गहरी अविश्वास की भावना शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है. उन्होंने स्वीकार किया कि यह समस्या एक दिन में हल नहीं हो सकती. फिर भी वेंस ने सतर्क आशावाद जताते हुए कहा कि ईरानी वार्ताकार समझौता चाहते हैं. पाकिस्तान में पिछले सप्ताह हुए 21 घंटे से ज्यादा चली मैराथन वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है. इस्लामाबाद फिलहाल उच्चस्तरीय कूटनीति का केंद्र बना हुआ है.

अविश्वास सबसे बड़ी चुनौती

जेडी वेंस ने टर्निंग पॉइंट यूएसए कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराना अविश्वास रातोंरात दूर नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, 'ईरान और अमेरिका के बीच बहुत अविश्वास है. आप इस समस्या को एक रात में नहीं सुलझा सकते.' पाकिस्तान में हुई पिछली बैठक में कोई ब्रेकथ्रू नहीं हुआ लेकिन वेंस ने जोर देकर कहा कि ईरानी पक्ष डील करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि वे मौजूदा स्थिति से 'बहुत अच्छा महसूस' कर रहे हैं. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्धविराम अभी एक सप्ताह और बाकी है. दोनों पक्ष अब इस छोटी खिड़की का इस्तेमाल विश्वास बढ़ाने के कदमों के लिए कर सकते हैं. वेंस की टिप्पणियां दिखाती हैं कि अमेरिका कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता.

पाकिस्तान में अगला दौर संभव

पाकिस्तान पिछले दौर की मेजबानी कर चुका है जहां वेंस खुद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे. यह दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे उच्चस्तरीय आमने-सामने की बातचीत थी. हालांकि वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हुई लेकिन दोनों पक्षों ने प्रक्रिया को पूरी तरह छोड़ने से इनकार कर दिया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगला दौर पाकिस्तान में ही हो सकता है. कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि मौजूदा युद्धविराम ने वार्ताकारों को एक संकीर्ण मौका दिया है. अगर विश्वास निर्माण के छोटे कदम सफल रहे तो बड़े राजनीतिक समझौते की राह निकल सकती है. पाकिस्तान दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में अहम भूमिका निभा रहा है.

परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध

पाकिस्तान वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर थी. अमेरिका ने 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा जबकि ईरान ने सिर्फ 5 साल का फ्रीज ऑफर किया. इस अंतर ने अस्थायी समझौते की उम्मीद जगाई लेकिन सत्यापन, अवधि और दीर्घकालिक गारंटी जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी.

वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया. यह गतिरोध गहरे अविश्वास को दर्शाता है. दोनों पक्ष अभी यह विश्वास नहीं कर पा रहे कि दूसरा पक्ष युद्धविराम के बाद भी स्थायी रियायतें देने को तैयार है.

नाकाबंदी और बढ़ता दबाव

वार्ता के टूटने के बाद अमेरिका ने हार्मुज जलडमरूमध्य से ईरानी बंदरगाहों आने-जाने वाले जहाजों पर नाकाबंदी शुरू कर दी है. इससे ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव तेज हो गया है. इस कदम से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है.

नाकाबंदी का मकसद अगले दौर की वार्ता में अमेरिका की मजबूत स्थिति बनाना है लेकिन इससे ईरान की बातचीत की मुद्रा सख्त भी हो सकती है. वेंस ने अविश्वास को स्वीकार करते हुए भी निरंतर संवाद पर जोर दिया. आने वाले दिन तय करेंगे कि क्या युद्धविराम को स्थायी शांति में बदला जा सकता है या अविश्वास फिर संघर्ष बढ़ा देगा.