उमर अब्दुल्ला ने तिरंगे का रिबन काटने से किया इनकार, बोले- इसे सम्मान से रखा जाए, वीडियो वायरल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान तिरंगे की धारियों वाली रिबन काटने से इनकार कर दिया. उन्होंने रिबन खोलकर वापस कर दी और कहा कि इसे सम्मान से रखा जाए.

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Sagar Bhardwaj

बुधवार को श्रीनगर के कश्मीर हाट में ‘नो योर आर्टिजन्स’ कार्यक्रम चल रहा था. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वहां उद्घाटन का रिबन काटने पहुंचे लेकिन उन्होंने रिबन काटने से इनकार कर दिया क्योंकि रिबन केसरिया, सफेद और हरे रंग की तिरंगी धारियों वाली थी. जैसे ही अब्दुल्ला ने यह देखा, उन्होंने कैंची उठाने से मना कर दिया. उन्होंने रिबन को काटने के बजाय हाथ से खोला, व्यवस्थापकों को लौटाया और सम्मानपूर्वक रखने का निर्देश दिया. यह घटना वहां मौजूद लोगों के कैमरों में कैद हो गई.  

कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज को काटना, फाड़ना अपराध

उमर अब्दुल्ला का यह कदम प्रतीकात्मक और कानूनी दोनों रूप से महत्वपूर्ण है. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज को काटना, फाड़ना या किसी भी तरह का अपमान करना अपराध माना गया है. हालांकि रिबन पर तिरंगे के रंग थे, लेकिन यह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था. फिर भी मुख्यमंत्री ने सतर्कता बरती. वह नहीं चाहते थे कि किसी भी तरह से तिरंगे के रंगों के साथ छेड़छाड़ का गलत संदेश जाए. उनके साथ उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, सलाहकार नासिर असलम वानी और अन्य अधिकारी मौजूद थे.  

मद्रास हाईकोर्ट ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला

गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट पहले भी एक ऐतिहासिक फैसले में कह चुका है कि तिरंगे के रंगों वाले केक या अन्य वस्तुओं को काटना अपराध की श्रेणी में नहीं आता, जब तक कि वे वास्तविक राष्ट्रीय ध्वज न हों. इस न्यायिक स्पष्टीकरण के बावजूद, अब्दुल्ला ने जोखिम नहीं लिया. उन्होंने रिबन को कैंची से काटने से इनकार किया और कहा कि इसे खोलकर सम्मानपूर्वक रखा जाए. यह व्यवहार किसी राजनेता की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है.  

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. लोग अब्दुल्ला के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं. कई उपयोगकर्ताओं ने इसे संवैधानिक सम्मान और सूझबूझ का उदाहरण बताया. विपक्षी नेताओं ने भी इस मौके पर बिना राजनीति किए अब्दुल्ला के निर्णय को सराहा. कार्यक्रम के आयोजकों ने बाद में बताया कि रिबन अनजाने में तिरंगे जैसी बन गई थी, और उन्होंने मुख्यमंत्री के फैसले का सम्मान करते हुए रिबन को संभाल कर रख लिया.