ईरान युद्ध खत्म होते ही 'धड़ाम' होंगे तेल के दाम: डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आएगी. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही.
अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तेल की कीमतों को लेकर बड़ा बयान दिया है. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के खत्म होते ही कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी. ट्रंप ने कहा, "जैसे ही यह युद्ध समाप्त होगा, कीमतें बहुत तेजी से नीचे आएंगी. मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म भी हो सकता है." उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और समुद्री रास्तों पर ईरान और अमेरिकी गठबंधन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है.
कीमतों को लेकर ट्रंप के बदलते बयान
ट्रंप के इस ताजा बयान से पहले कुछ दिनों तक ऐसे संकेत मिल रहे थे कि वह ईंधन कीमतों को लेकर सतर्क हैं. कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि नवंबर के कांग्रेसी चुनावों तक पेट्रोल-डीजल के दाम यथावत रह सकते हैं या शायद "थोड़े और बढ़ सकते हैं". इस बयान की काफी आलोचना हुई थी. बाद में व्हाइट हाउस में एक और इंटरव्यू रिकॉर्ड किया गया, जिसमें ट्रंप ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि फिलहाल तेल की कीमतों का 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना उनके लिए ठीक है. लेकिन एक बार लड़ाई रुकी, तो दाम बहुत नीचे आ जाएंगे.
अमेरिकी गैसोलीन पर क्या असर होगा?
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका में इस समय गैसोलीन की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से थोड़ी अधिक है. लेकिन अगर ईरान युद्ध का अंत जल्द होता है, तो चुनावों से काफी पहले ही पेट्रोल के दाम गिरने लगेंगे. उन्होंने कहा, "जब यह मामला सुलझ जाएगा, गैस की कीमतें जबरदस्त रूप से नीचे आएंगी." यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी बाजार में मुद्रास्फीति और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता पहले से मौजूद है.
ईरान के साथ बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
ट्रंप के इन दावों के बीच ईरान और अमेरिकी गठबंधन के बीच समुद्री रास्तों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके जहाजों के खिलाफ कोई नौसैनिक नाकाबंदी की गई, तो इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा. इसका असर होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों पर माल ढुलाई पर पड़ सकता है. इन रास्तों से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी.