हिजबुल्लाह के लड़ाके अब सीरिया का अस्तित्व बचाने के लिए लड़ेंगे लड़ाई, रूस, ईरान के साथ मिलकर विद्रोहियों का करेंगे खात्मा
Hezbollah sent 2 thousand fighters to Syria: लेबनान के हिजबुल्लाह ने सीरिया में 2,000 लड़ाके भेजे हैं. इसकी जानकारी सशस्त्र समूह के एक करीबी सूत्र ने शनिवार को बताया.
Hezbollah sent 2 thousand fighters to Syria: सीरिया में चल रहे गृह युद्ध में अब एक नई जंग का आगाज हो गया है. ईरान-समर्थित हिजबुल्लाह ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को बचाने और विद्रोही समूहों का सफाया करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है. रूस और ईरान के सहयोग से हिजबुल्लाह सीरिया के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई में अग्रसर है.
हिजबुल्लाह ने अपने 2,000 लड़ाकों को सीरिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कुसैर क्षेत्र में तैनात किया है. यह क्षेत्र सीरिया और लेबनान की सीमा के करीब है और इसे सामरिक दृष्टि से अहम माना जाता है. सूत्रों के अनुसार, इन लड़ाकों को पहाड़ी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने और विद्रोही गुटों के आक्रमण को रोकने के लिए भेजा गया है.
सूत्र बताते हैं कि हिजबुल्लाह ने अब तक सीधे किसी लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन वे अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. संगठन के 150 सैन्य सलाहकार होम्स शहर भेजे गए हैं, ताकि सीरियाई सेना को शहर की रक्षा में मदद मिल सके.
इन शहरों पर विद्रोहियों का कब्जा
सीरिया में विद्रोही हमले ने युद्ध को एक नया मोड़ दिया है. विद्रोही गुटों ने उत्तरी शहर अलेप्पो और केंद्रीय शहर हामा पर कब्जा कर लिया है. यह आक्रमण 27 नवंबर को शुरू हुआ, ठीक उसी दिन जब हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू हुआ.
विद्रोहियों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण सीरियाई सेना और उसके समर्थक बलों पर दबाव बढ़ गया है. सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, विद्रोही अब होम्स के दरवाजे तक पहुंच चुके हैं और राजधानी दमिश्क की ओर बढ़ रहे हैं.
रूस और ईरान का समर्थन
हिजबुल्लाह के अलावा, रूस और ईरान भी असद सरकार को समर्थन दे रहे हैं. रूस ने पिछले वर्षों में सीरियाई सेना को सैन्य सहायता प्रदान की है, जबकि ईरान ने अपने क्रांतिकारी गार्ड्स को लड़ाई में शामिल किया है. हाल ही में, ईरान ने अलेप्पो में लड़ाई के दौरान अपने एक शीर्ष जनरल की मौत की पुष्टि की.
2013 के बाद से, हिजबुल्लाह ने खुलकर असद सरकार का समर्थन किया है. हिजबुल्लाह के लड़ाके सीरियाई सेना के साथ मिलकर कुसैर शहर पर विद्रोहियों से नियंत्रण वापस लेने में सफल हुए थे. वहां उन्होंने अपना सैन्य बेस और प्रशिक्षण शिविर स्थापित किया.