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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की पत्नी को संसद से मिली राहत, तो विरोध में उतरी जनता ने किया चक्का जाम

South Korea: राष्ट्रपति यून सुक योल ने देश में आपातकालीन मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा की थी, जिसे संसद में दो घंटे के भीतर रद्द कर दिया गया. इसके बाद से ही उनके खिलाफ विरोध तेज हो गया है.

Gyanendra Tiwari
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की पत्नी को संसद से मिली राहत, तो विरोध में उतरी जनता ने किया चक्का जाम
Courtesy: Social Media

South Korea: दक्षिण कोरिया की विपक्ष-प्रमुख संसद ने शनिवार को प्रथम महिला किम कियोन-ही के खिलाफ प्रस्तावित विशेष वकील जांच विधेयक को खारिज कर दिया. इस विधेयक का उद्देश्य किम कियोन-ही के खिलाफ स्टॉक मूल्य हेरफेर और चुनाव परिणामों में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करना था. संसद में विधेयक खारिज होने के बाद दक्षिण कोरियाई जनता ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए उनके महाभियोग की मांग की.

विपक्षी दल द्वारा लाए गए इस विधेयक के समर्थन में पर्याप्त संख्या में सांसदों का समर्थन नहीं मिला. संसद में 300 में से 102 सांसदों ने इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया. इसके परिणामस्वरूप, प्रस्ताव को पारित नहीं किया जा सका.

किम कियोन-ही और विवादों का सिलसिला

किम कियोन-ही पर डॉएचे मोटर्स स्टॉक हेरफेर मामले में आरोप लगे थे, लेकिन अदालत ने उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने माना कि किम को उनके खाते से जुड़े लेनदेन की जानकारी नहीं थी, क्योंकि इसे एक बाहरी प्रबंधक द्वारा संचालित किया जा रहा था.

 किम का नाम एक अन्य विवाद में भी उछला, जिसमें राजनीतिक सलाहकार म्युंग ताए-क्युन की भूमिका पर सवाल उठाए गए. म्युंग पर सरकारी पदों के लिए उम्मीदवारों की नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप हैं. इसके अतिरिक्त, किम के कला प्रदर्शनी कंपनी "कोवाना कंटेंट्स" से जुड़े अन्य विवाद भी सामने आए हैं.

सार्वजनिक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन

किम कियोन-ही की छवि पर तब और अधिक सवाल उठे, जब एक वीडियो में उन्हें एक पादरी से 2,200 डॉलर का डायर ब्रांड का हैंडबैग उपहार के रूप में स्वीकार करते हुए दिखाया गया. यह कोरियाई कानून का उल्लंघन है, जो सार्वजनिक अधिकारियों को 750 डॉलर से अधिक मूल्य के उपहार स्वीकार करने से रोकता है.

 संसद में विधेयक खारिज होने के बावजूद, इस प्रकरण ने राष्ट्रपति और प्रथम महिला दोनों की छवि को प्रभावित किया है. लोकतंत्र के प्रति संसद की प्रतिबद्धता और निष्पक्ष जांच की मांग अब भी दक्षिण कोरियाई जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.