12 फरवरी को भारत बंद, ट्रेड यूनियनों ने क्यों बुलाई हड़ताल, जानें क्या-क्या सेवाएं रहेंगी प्रभावित

यह विरोध श्रम अधिकारों, निजीकरण और वेतन नीतियों से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए आयोजित किया गया है.

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Sagar Bhardwaj

कई ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को भारत बंद का ऐलान किया है. इस फैसले के बाद बैंकिंग, ट्रांसपोर्ट और आवश्यक सेवाएं बाधित हो सकती हैं. यह विरोध श्रम अधिकारों, निजीकरण और वेतन नीतियों से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए आयोजित किया गया है.

आइए जानें भारत बंद का आह्वान क्यों किया गया है

10 ट्रेड यूनियनों के गठबंधन INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF,  और UTUC ने भारत बंद का आह्वान किया है.

ट्रेड यूनियन उन चार श्रम संहिता विधेयकों का विरोध कर रहे हैं जो 2025 में 29 श्रम कानूनों को की जगह लाए गए हैं. उनका मानना है कि ये विधेयक मजदूरों के अधिकारों को बुरी तरह प्रभावित करेंगे, नौकरी की सुरक्षा को खत्म करेंगे और नियोक्ता के लिए भर्ती और लोगों को नौकरी से हटाने की प्रकिया को बहुत आसान बना देंगे. इसके अलावा उन्होंने निजीकरण, स्थिर वेतन और सामाजिक सुरक्षा के अभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की है.

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें

चार श्रम विधेयकों और उससे जुड़े नियमों को हटाना उनकी प्रमुख मांग है. इसके अलावा प्रस्तावित विधेयकों को वापस लेना और ग्रामीण नौकरी योजनाओं के तहत मजबूत रोजगार की गारंटी उनकी प्रमुख मांगें हैं.

बता दें कि सरकार द्वारा प्रस्तावित बिलों में बीज विधेयक का मसौदा, विद्युत संशोधन विधेयक और  परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (SHANTI) अधिनियम शामिल है. वे इन सभी बिलों को वापस लेने, मनरेगा को बहाल करने और विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं.

किसानों का भी मिला साथ

किसान निकायों जैसे समयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के कारण भारत बंद का पूरा समर्थन करने का ऐलान किया है. अपने एक बयान में  SKM ने कहा कि यह अंतरिम व्यापार समझौता भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के हाथों में पूरी तरह सौंपना है. उन्होंने कहा कि डेयरी उत्पादों, सोयाबीन तेल, पशु आहार और अन्य कृषि आयात के लिए भारतीय बाजारों को खोलने से घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है.

संघ ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग की और उन पर ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौतों में डेयरी उत्पादों को शामिल करने के मुद्दे पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया.

क्या-क्या सेवाएं रहेंगी प्रभावित

 

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाएं
  • सार्वजनिक परिवहन
  • बाज़ार और दुकानें
  • सरकारी कार्यालय
  • केरल, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में शैक्षणिक संस्थान