नई दिल्ली: इंडोनेशिया के बांदा सागर क्षेत्र में मंगलवार को तेज़ भूकंप के झटके महसूस किए गए. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 6.6 मापी गई, जबकि इसका केंद्र समुद्र के भीतर लगभग 137 किलोमीटर गहराई पर स्थित था.
GFZ के वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी गहराई में भूकंप आने के कारण सतह पर इसका असर अपेक्षाकृत कम महसूस किया गया. स्थानीय समयानुसार सुबह झटके महसूस किए गए, जिससे मलुकू और सुलावेसी द्वीपों में लोगों में हल्की दहशत फैल गई.
इंडोनेशिया की भू-भौतिकी एजेंसी (BMKG) ने पुष्टि की है कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, किसी भी क्षेत्र से जनहानि या संपत्ति नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है.
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में इंडोनेशिया में लगातार कई बार धरती हिली है, जो इस क्षेत्र में टेक्टॉनिक हलचलों के तेज़ होने का संकेत देता है. BMKG ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, क्योंकि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है.
इंडोनेशिया में बार-बार भूकंप आने का मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है. यह देश प्रशांत महासागर की 'रिंग ऑफ फायर' में स्थित है. यह धरती का सबसे भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है.
इंडोनेशिया उस जगह स्थित है जहाँ तीन बड़ी टेक्टॉनिक प्लेटें, ऑस्ट्रेलियन प्लेट, यूरेशियन प्लेट और पैसिफ़िक प्लेट आपस में टकराती हैं. इन प्लेटों की टक्कर, धंसाव और घर्षण से जमीन के भीतर भारी दबाव बनता है. जब यह दबाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है.
ऑस्ट्रेलियन प्लेट, यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है. इस प्रक्रिया में पृथ्वी की परतें मुड़ती हैं और तनाव बढ़ता है. जब यह तनाव अचानक टूटता है, तो तीव्र झटके और कभी-कभी सुनामी पैदा होती है. यही प्रक्रिया 2004 के सुमात्रा-सुनामी का कारण बनी थी.
इंडोनेशिया में 130 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं. यह दुनिया में सबसे ज्यादा हैं. इन ज्वालामुखियों के आसपास की भूकंपीय गतिविधियां अक्सर भूकंपों को ट्रिगर करती हैं.
इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों का देश है. इसकी जटिल भू-संरचना (जमीन और समुद्र के नीचे दोनों) के कारण छोटे और मध्यम भूकंप बहुत बार दर्ज किए जाते हैं.