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India Daily

Rahul Gandhi: क्या राहुल गांधी देश के लिए बन चुके हैं खतरा? उन्होंने क्यों कहा- हम भारत राष्ट्र से लड़ रहे हैं? समझिए

राहुल गांधी ने देश की सभी वैधानिक और गैर-वैधानिक संस्थाओं के खिलाफ युद्ध की बात की है, जैसे कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, विधि आयोग, भारतीय सशस्त्र सेना, सीबीआई, ईडी, और राष्ट्रीय सतर्कता आयोग. वे लोकायुक्त और लोकपालों के खिलाफ भी लड़ने की बात कर रहे हैं.

Gyanendra Tiwari
Rahul Gandhi: क्या राहुल गांधी देश के लिए बन चुके हैं खतरा? उन्होंने क्यों कहा- हम भारत राष्ट्र से लड़ रहे हैं? समझिए
Courtesy: Social Media

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने 20 साल से ज्यादा के राजनीतिक करियर में कई बार ऐसे बयान दिए हैं, जिनसे उनकी समझदारी पर सवाल उठे हैं. कई बार उनकी बातें नासमझी की वजह से नजरअंदाज की गई हैं, और वे गलत तथ्यों के आधार पर राजनीतिक तौर पर फंसे हैं. लेकिन इस बार उन्होंने 'भारत राष्ट्र' से लड़ने की बात कहकर अपने ऊपर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

राहुल गांधी ने बुधवार को कहा था, "हम बीजेपी, आरएसएस और खुद भारत राष्ट्र (The Indian State) से लड़ रहे हैं." उनका कहना था कि यह केवल एक राजनीतिक संघर्ष नहीं है. यही वही राहुल गांधी हैं, जो कहते हैं, "मैं नहीं मानता कि भारत एक राष्ट्र है." वे बार-बार यह कहते रहते हैं कि भारत सिर्फ राज्यों का एक संघ है, और उन्हें राष्ट्रवाद में विश्वास नहीं है. उनका ताजा बयान इस बात की पुष्टि करता है.

संविधान के अनुच्छेद 12 में भारत राष्ट्र को केंद्रीय सरकार के विधायी और कार्यकारी अंग के रूप में परिभाषित किया गया है. राहुल गांधी ने भारत राष्ट्र से लड़ने की बात कहकर देश की चुनी हुई सरकार के खिलाफ युद्ध की बात की है. उनका बयान लोकसभा, राज्यसभा, राज्य सरकारों, पंचायतों, और अन्य सभी सरकारी संस्थाओं के खिलाफ युद्ध का ऐलान है.

राहुल गांधी ने पहले भी देश को और सेना को जातियों के आधार पर बांटने की कोशिश की है. पहले यह लगता था कि वे यह सब अज्ञानता में कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ लग रहा है कि वे जानबूझकर और खतरनाक मंशा से ऐसा कर रहे हैं.

भारत राष्ट्र से लड़ने की बात कहकर राहुल ने देश के राष्ट्रपति, सभी राज्यपालों, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, हाई कोर्ट के जजों, और सभी चुनी हुई सरकारों के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है. यह सभी संस्थाएं देश के लोकतंत्र का हिस्सा हैं.

राहुल गांधी की माओवादी सोच सबसे पहले तब दिखी थी, जब उन्होंने अपनी ही सरकार के एक कैबिनेट प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था. इसके बाद, राहुल गांधी चीन के राष्ट्रपति और कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक डील पर हस्ताक्षर करते नजर आए थे.

राहुल ने कभी यह नहीं बताया कि कांग्रेस पार्टी, जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा करती है, उसके नेता ने दुश्मन देश की सत्ताधारी पार्टी के साथ डील क्यों की. इसके अलावा, डोनाल्ड लू, जो सीआईए के इशारे पर दूसरे देशों में सत्ता परिवर्तन करवाने के लिए कुख्यात है, से राहुल गांधी ने 10 सितंबर 2024 को क्यों मुलाकात की? और राहुल ने भारत-विरोधी आवाज उठाने वाली सोमाली-अमेरिकी राजनेता इल्हान उमर से क्यों मुलाकात की?

इन सभी कारणों से यह शक गहरा रहा है कि जब 2017 में सिक्किम के डोकलाम में भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच संघर्ष हो रहा था, तो क्या राहुल गांधी गुपचुप तरीके से चीनी अधिकारियों से मिले थे? क्या 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी मंत्रियों से गुप्त मुलाकात की थी?