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बढ़ाता है स्वाद या जहर का कारण, मसालों में क्यों मिलाया जाता है एथलीन ऑक्साइड?

MDH और एवरेस्ट समेत देश के कुछ मसाले, विदेश में बैन हुए हैं. वजह उनमें पाया जाने वाला एथलीन ऑक्साइड है. दावा किया जाता है कि इससे कैंसर होता है. मसालों में इसकी जरूरत क्यों पड़ती है, आइए समझते हैं.

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पैकेट बंद मसाले उतने अच्छे होते नहीं हैं, जितना हम समझते हैं. सिंगापुर से लेकर अमेरिका तक, कुछ भारतीय मसालों पर बैन लगा है. वजह ये है कि उनमें एथिलीन ऑक्साइड की मात्रा, तय सीमा से अधिक है. यह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. आखिर देसी मसालों वाले इस देश में ऐसा क्या हुआ कि अचानक ऐसे मसालों की मांग बढ़ गई, जिनमें केमिकल के जरिए स्वाद पैदा किया जा रहा हो.

क्या है एथिलीन ऑक्साइड?
एथिलीन ऑक्साइड एक रासायनिक यौगिक है, जिसका केमिकल फॉर्मूला C2H40 है. यह एक ज्वलनशील, रंगहीन गैस है, जिसमें रूम टेंपरेचर पर मीठी गंध आती है. यह डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसकी वजह से इसे स्टरलाइजिंग एजेंट में रखा जाता है. इस रासायनिक यौगिक का यही गुण एथिलीन ऑक्साइड को कार्सिनोजेनिक की लिस्ट में रखता है, जिसे हानिकारक माना जाता है. इसी वजह से इसे कैंसरकारक तत्व भी कहा जाता है.

एथिलीन ऑक्साइड क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक यह एंटीफ्रिज और दूसरे केमिकल्स को तैयार करने में मददगार होता है. इसका इस्तेमाल एथिलीन ग्लाईकोल तैयार करने के लिए उत्प्रेरक की तरह तैयार किया जाता है. इसे मसालों में स्टेरेलाइजिंग एजेंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मसालों से अच्छी खुशबू आए. इसके इस्तेमाल की वजह से अच्छा स्वाद भी आता है. स्वाद की यह ललक लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. तभी सिंगापुर जैसे देशों में इसके इस्तेमाल को रोका गया है. इसकी मात्रा तय करने की मांग भी दुनियाभर की कंपनियां कर रही हैं.

क्या एथिलीन ऑक्साइड नुकसानदेह है?
इंटरनेशनल रिसर्च ऑन कैंसर के मुताबिक एथिलिन ऑक्साइड को कार्सिनोजिक ग्रुप 1 में रखा गया है. अभी तक ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि ये इंसानों में कैंसर पैदा करता है. एथिलीन ऑक्साइड शरीर में सांस लेने और निगलने की वजह से पहुंचता है. अमेरिका की एक पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी का दावा है कि एथिलीन ऑक्साइड लिम्फोइड कैंसर और ब्रेस कैंसर की वजह भी बनता है.