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Gyanvapi Case में बड़ा फैसला, हिंदुओं को व्यास जी के तहखाने में मिली पूजा की अनुमति

Varanasi Gyanvapi Case: ज्ञानवापी केस में बड़ा फैसला आया है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष को व्यास जी के तहखाने में पूजा-पाठ करने का अधिकार दे दिया है. 

Amit Mishra
Edited By: Amit Mishra
Gyanvapi Case में बड़ा फैसला, हिंदुओं को व्यास जी के तहखाने में मिली पूजा की अनुमति

Varanasi Gyanvapi Case: वाराणसी के ज्ञानवापी मामले को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है. ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा करने की मांग से जुड़ी याचिका पर कल यानी मंगलवार (30 जनवरी 2024) को वाराणसी जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई हुई थी. हिंदू पक्ष ने व्यास जी के तहखाने में पूजा-पाठ करने इजाजत की मांगी थी. दोनों पक्षों के दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब इसी मामले में जिला जज ने अपना फैसला सुना दिया है. 

सात दिनों के भीतर शुरू होगी पूजा 

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, "...पूजा सात दिनों के भीतर शुरू होगी. सभी को पूजा करने का अधिकार होगा...हिंदू पक्ष को 'व्यास का तहखाना' में पूजा करने की इजाजत दी गई. जिला प्रशासन को 7 दिन के अंदर व्यवस्था करनी होगी." 

तहखाने में मिला पूजा का अधिकार 

ज्ञानवापी केस में बड़ा फैसला आया है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष को व्यास जी के तहखाने में पूजा-पाठ करने का अधिकार दे दिया है. इससे पहले हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया था कि नवंबर 1993 तक सोमनाथ व्यास जी का परिवार उस तहखाने में पूजा पाठ करता था, जिसे मुलायम सिंह की सरकार में बंद करा दिया गया था.

कोर्ट का आदेश 

वाराणसी की जिला अदालत के जज ने कहा है कि जो व्यास जी का तहखाना है, अब उसके कस्टोडियन वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट हो गए हैं, इसीलिए विश्वनाथ मंदिर के जो पुजारी हैं वो उस तहखाना की साफ-सफाई करवाएंगे. वहां जो बैरिकेडिंग लगी हुई है, उस बैरिकेडिंग को हटाएंगे और फिर वाराणसी मंदिर के पुजारी व्यास तहखाने के अंदर नियमित रूप से पूजा करेंगे.

मुस्लिम पक्ष ने किया विरोध

हालाकिं, हिन्दू पक्ष के इस दावे का मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में विरोध किया और हिंदुओं को वहां किसी भी तरह के पूजा-पाठ का अधिकार ना मिले इसकी अपील भी जिला जज के अदालत में की. मुस्लिम पक्ष की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि वहां किसी भी तरह की कोई भी पूजा-पाठ नहीं होती थी.