अमेरिकी महिला क्रिस्टन फिशर (Kristen Fischer) कई सालों से भारत में रह रही हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की सराहना की. क्रिस्टन ने बताया कि कैसे रसोई में सब्जी काटते वक्त उनका अंगूठा गहराई से कट गया और खून बहने लगा. इलाज के लिए जब वह नजदीकी अस्पताल पहुंचीं तो महज 50 रुपये में उनका इलाज हो गया. अमेरिका में इसी इलाज पर हजारों डॉलर खर्च होते, लेकिन भारत में उन्हें न सिर्फ राहत मिली बल्कि समय भी बचा.
क्रिस्टन ने वीडियो में बताया कि जब अंगूठे से लगातार खून बह रहा था और खून रोकने के सारे प्रयास नाकाम हो गए, तो उन्होंने अपने साथी से कहा कि अब अस्पताल जाना ही पड़ेगा. अंगूठे पर पट्टी बांधकर वह साइकिल से नजदीकी अस्पताल पहुंचीं. वहां मौजूद डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत उन्हें आपातकालीन कक्ष में ले जाकर खून रोकने की कोशिश की. नर्स ने खास तरीके से पट्टी बांधी और बताया कि शायद टांके लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.
इलाज के बाद जब क्रिस्टन बिल चुकाने के लिए रिसेप्शन पहुंचीं तो उन्हें केवल 50 रुपये चुकाने पड़े. उन्होंने कहा कि पूरा इलाज और प्रक्रिया महज 45 मिनट में पूरी हो गई. अमेरिका की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वहां सिर्फ इमरजेंसी रूम में कदम रखते ही 2000 डॉलर (करीब डेढ़ लाख रुपये) का बिल बन जाता है. भारत में न तो इंतजार करना पड़ा और न ही भारी-भरकम खर्च उठाना पड़ा.
यह वीडियो वायरल होते ही अब तक 1 लाख 14 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं. यूजर्स ने भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ की और कहा कि भारत में मेडिकल मदद कभी बोझ नहीं लगती. एक यूजर ने लिखा, 'India’s healthcare is the best in the world', जबकि दूसरे ने टिप्पणी की, 'यहां मदद की कोई कमी नहीं है, खासकर मेडिकल मदद.' कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए. एक दिल्ली निवासी ने लिखा कि राजधानी में कई चैरिटेबल अस्पताल हैं जो दान और फंडिंग से चलते हैं.
वीडियो पर प्रतिक्रियाओं में कई लोगों ने अमेरिका के महंगे इलाज का जिक्र किया. एक यूजर ने लिखा, 'मेरी बेटी को अमेरिका में मामूली इलाज के लिए 40 हजार रुपये खर्च करने पड़े, जबकि भारत में यही काम 1000 रुपये में हो जाता.' क्रिस्टन ने भी कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का आसान और सस्ता होना उनके लिए सबसे बड़ी राहत है. यही वजह है कि उन्होंने कहा 'Just another reason why I love Indian healthcare so much.”