Justice Yashwant Varma: घर में नकदी का मामला, सुप्रीम कोर्ट सोमवार को करेगा जस्टिस वर्मा की याचिका पर सुनवाई
उच्चतम न्यायालय 28 जुलाई को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने आधिकारिक आवास से बेहिसाब नकदी बरामद होने के आरोपों की आंतरिक जांच की कानूनी वैधता को चुनौती दी है
Justice Yashwant Varma: उच्चतम न्यायालय 28 जुलाई को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने आधिकारिक आवास से बेहिसाब नकदी बरामद होने के आरोपों की आंतरिक जांच की कानूनी वैधता को चुनौती दी है. यह मामला न केवल न्यायिक स्वतंत्रता के सवालों को उठाता है, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं और न्यायिक जवाबदेही के बीच संतुलन को भी जांचता है. न्यायमूर्ति वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि 1999 के पूर्ण न्यायालय प्रस्ताव के तहत अपनाई गई आंतरिक जांच प्रक्रिया, जिसे न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों को निपटाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए बनाया गया था, "अनुचित रूप से स्व-नियामक और तथ्य-खोज के दायरे से परे है."
उन्होंने कहा, "मुख्य रूप से, न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों को निपटाने और जनता का विश्वास बनाए रखते हुए न्यायिक स्वतंत्रता को संरक्षित करने के लिए 1999 के पूर्ण न्यायालय प्रस्ताव के माध्यम से अपनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया, अनुचित रूप से स्व-नियमन और तथ्य-खोज के इच्छित दायरे से परे है." उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह प्रक्रिया एक समानांतर, संविधानेतर तंत्र बनाती है, जो संविधान के अनुच्छेद 124 और 218 के तहत स्थापित ढांचे से अलग है. यह ढांचा न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जांच के बाद संसद में विशेष बहुमत द्वारा समर्थित अभिभाषण के माध्यम से उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की शक्ति प्रदान करता है.
मीडिया ट्रायल और प्रतिष्ठा को क्षति
न्यायमूर्ति वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके आवास पर जले हुए नोटों की गड्डियां दिखाने वाले कथित वीडियो को सार्वजनिक करने के फैसले पर भी सवाल उठाए. उन्होंने इसे "स्पष्टतः असंगत और कानून का उल्लंघन" करार दिया. याचिका में कहा गया है, "इस माननीय न्यायालय द्वारा 22.03.2025 को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन असत्यापित आरोपों का अभूतपूर्व सार्वजनिक खुलासा करने से याचिकाकर्ता को मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप एक न्यायिक अधिकारी के रूप में उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और करियर को अपूरणीय क्षति हुई."
तीन सदस्यीय पैनल की जांच
14 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल ने इस मामले की जांच की थी. इस पैनल में न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश), न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया (हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश), और न्यायमूर्ति अनु शिवरामन (कर्नाटक उच्च न्यायालय) शामिल थे. पैनल ने 22 मार्च को अपनी रिपोर्ट में आरोपों को विश्वसनीय पाया था. न्यायमूर्ति वर्मा ने इस पैनल की रिपोर्ट को भी चुनौती दी है, यह तर्क देते हुए कि इसके निष्कर्ष बिना उचित प्रक्रिया के और अपर्याप्त हैं. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश सहित इस रिपोर्ट से उत्पन्न प्रत्येक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
सुनवाई की तारीख और पीठ
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. याचिकाकर्ता ने अपनी पहचान गुप्त रखने की मांग भी की है, जिस पर भी कोर्ट विचार करेगा. 23 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को आश्वासन दिया था कि इस मामले की सुनवाई के लिए एक पीठ गठित की जाएगी.