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'कोहरा 2' में सस्पेंस का मिलेगा भरपूर डोज, कत्ल, टूटे रिश्तों और अनसुलझे ट्रॉमा को सुलझाएंगे बरुन सोबती-मोना सिंह, देखने से पहले पढ़ें रिव्यू

'कोहरा 2' में बरुण सोबती और मोना सिंह मुख्य भूमिका में हैं, जो पंजाब के एक छोटे से कस्बे में हुई हत्या को सुलझाने की कोशिश करते हैं, साथ ही साथ अपने निजी संघर्षों से भी जूझते हैं.

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मुंबई: नेटफ्लिक्स की हिट सीरीज कोहरा का दूसरा सीजन आज यानी 11 फरवरी 2026 से स्ट्रीमिंग शुरू हो गया है. पहली सीजन की तरह ही यह सीजन भी पंजाब के कोहरे और अंधेरे में लिपटा एक क्राइम थ्रिलर है, लेकिन इस बार कहानी नई है और किरदारों का तालमेल अलग. बरुन सोबती और मोना सिंह की जोड़ी ने इसे और भी मजबूत बनाया है. सीरीज में एक बार फिर पंजाब के छोटे शहर की पृष्ठभूमि में एक क्रूर हत्या होती है, जिसकी जांच करते हुए पुलिस वाले अपने निजी दुखों से जूझते हैं.

सस्पेंस का मिलेगा भरपूर डोज

सीजन 2 में बरुन सोबती वापस लौटे हैं असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर अमरपाल गरुंडी के रोल में. पहले सीजन के बाद गरुंडी अब अपने पुराने शहर जगराना को छोड़कर नए शहर दलेरपुरा में बस चुके हैं. उनकी जिंदगी अब बेहतर लग रही है. उनकी पत्नी सिल्की (मुस्कान अरोड़ा) एक ब्यूटीशियन हैं और वे अपना नाखून बार शुरू करने वाली हैं. गरुंडी अब खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन एक नई हत्या उन्हें फिर से जांच के घेरे में ला देती है.


इस बार उनकी बॉस सब-इंस्पेक्टर धनवंत कौर हैं, जिन्हें मोना सिंह ने शानदार तरीके से निभाया है. धनवंत एक सख्त, अनुभवी और भावनात्मक रूप से मजबूत पुलिस अधिकारी हैं. शुरू में गरुंडी को महिला बॉस के आदेश मानने में थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन जैसे-जैसे केस आगे बढ़ता है, धनवंत अपनी मेहनत और समझदारी से उनका सम्मान जीत लेती हैं.

टूटे रिश्तों और अनसुलझे ट्रॉमा को सुलझाएंगे बरुन सोबती-मोना सिंह

मोना सिंह का रोल इतना प्रभावशाली है कि कई रिव्यूज में उन्हें 'मदर ऑफ ऑल रोल्स' कहा गया है. उन्होंने एक ऐसी महिला पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया है जो न सिर्फ केस सॉल्व करती है, बल्कि अपनी जिंदगी के दर्द को भी छिपाती है. सीरीज की खासियत यह है कि यह सिर्फ मर्डर मिस्ट्री नहीं है. यह बॉन्डेड लेबर, क्षेत्रीय भेदभाव, स्टॉकहोम सिंड्रोम और पितृसत्ता जैसे बड़े सामाजिक मुद्दों पर गहराई से बात करती है. कहानी अंदर से बाहर की तरफ बढ़ती है, यानी पहले किरदारों के व्यक्तिगत संघर्ष दिखते हैं, फिर अपराध की परतें खुलती हैं.

बरुन सोबती का परफॉर्मेंस एक बार फिर शानदार

पंजाब की ग्रामीण पृष्ठभूमि, कोहरा, ठंड और गंदगी को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन कमाल के हैं, जो पूरे माहौल को और डार्क बनाते हैं. बरुन सोबती का परफॉर्मेंस एक बार फिर शानदार है. वे गरुंडी के रूप में एक ऐसे आदमी को दिखाते हैं जो बाहर से मजबूत लगता है, लेकिन अंदर से टूटा हुआ है. उनकी एक्टिंग में वो संयम और इमोशन का बैलेंस है जो दर्शक को बांधे रखता है. मोना सिंह के साथ उनकी केमिस्ट्री सीरीज का हाइलाइट है. दोनों ही अभिनेता अपने रोल में पूरी तरह डूबे नजर आते हैं.

सीरीज सस्पेंस, इमोशन और सोशल कमेंट्री का बेहतरीन मिश्रण

सपोर्टिंग कास्ट में रन्नविजय सिंघा, पूजा भामराह और अन्य कलाकार भी अच्छा काम करते हैं. कुछ रिव्यूज में कहा गया है कि कहानी थोड़ी धीमी है और एक्सपोजिशन ज्यादा है, लेकिन कुल मिलाकर यह सीरीज सस्पेंस, इमोशन और सोशल कमेंट्री का बेहतरीन मिश्रण है. अगर आपको स्लो-बर्न थ्रिलर पसंद हैं जो सिर्फ क्राइम नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों और समाज की सच्चाई दिखाते हैं, तो 'कोहरा 2' आपके लिए परफेक्ट है. नेटफ्लिक्स पर 6 एपिसोड्स वाले इस सीजन को देखने के बाद दिमाग में धुंध की तरह सवाल और इमोशंस लंबे समय तक छाए रहते हैं.