लोकसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना पक्ष रखा और विपक्ष को आड़े हाथों लिया, तब हर किसी की निगाहें कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर थीं. वजह साफ थी थरूर खुद जून महीने में इस ऑपरेशन पर बनी सर्वदलीय समिति का नेतृत्व कर चुके हैं. लेकिन जब मीडिया ने उनसे इस बारे में प्रतिक्रिया चाही, तो उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया.
केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर से जब पीएम मोदी के भाषण पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा, "मैं इस विषय पर कोई बयान नहीं दे रहा हूं" इतना ही नहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें किसी नेता का भाषण विशेष रूप से अच्छा लगा, तो उन्होंने तब भी चुप्पी साधे रखी. यह तब है जब थरूर ने पहले ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और इसके कोड-नाम की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी.
अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को ‘फ्री हैंड’ दिया गया था “कब, कहां और कैसे हमला करना है, यह फैसला सेना को लेना था.” उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के समर्थन में सिर्फ तीन देशों ने बात की, और यह भारत की कूटनीतिक सफलता थी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी नेता ने भारत से ऑपरेशन रोकने की मांग नहीं की थी.
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस पर कई पुराने मुद्दों को लेकर हमला किया. बाटला हाउस एनकाउंटर से लेकर सिंधु जल संधि तक, उन्होंने कहा कि यह सब कांग्रेस की नीतियों की गलतियों का नतीजा है. “सिंधु जल संधि नेहरू की सबसे बड़ी भूल थी.” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब 'न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग' से डरने वाला देश नहीं रहा. ऑपरेशन सिंदूर इसका सशक्त प्रमाण है.
पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद की सैन्य प्रतिक्रिया को लेकर संसद में तीन दिन तक बहस चली. सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे. बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर ज़बर्दस्त तकरार देखने को मिली. पर इस बीच, शशि थरूर का चुप रहना सभी को खटका. खासतौर पर तब, जब वह इस ऑपरेशन को लेकर पहले सार्वजनिक मंचों पर बोल चुके हैं.