ब्रिक्स शिखर समिट में शामिल होने के लिए भारत आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में दीर्घकालिक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. मीडिया से बात करते हुए लावरोव ने कहा कि जहां पाकिस्तान तात्कालिक समस्याओं के समाधान के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है वहीं दीर्घकालिक मुद्दों को हल करने में मदद के लिए भारत की मदद ली जा सकती है.
लावरोव ने कहा कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच तात्कालिक समस्याओं के सामाधान के लिए संवाद स्थापित करने में मदद कर रहा है. यदि वे दीर्घकालिक मध्यस्थ की तलाश करते हैं तो भारत अपने व्यापक राजनयिक अनुभव को देखते हुए यह भूमिका निभा सकता है. ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद लावरोव की ये टिप्पणयां ऐसे समय में आईं जब प्रधानमंत्री मोदी यूएई में थे.
हालांकि पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है लेकिन तेहरान के परमाणु कार्यक्रम सहित कई विवादास्पद मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी है. इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संकेत दिया है कि यदि ऐसी स्थिति आती है तो भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है.
अप्रैल में बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, 'भारत ने प्रयास किए लेकिन हर चीज का एक समय होता है. हो सकता है कल भारत को इसमें अपनी भूमिका निभाने का मौका मिले और सफलता भी मिले. हम इसकी संभावना से इनकार नहीं कर सकते. प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से युद्ध को समाप्त करने की अपील की है. कूटनीतिक मामलों के प्रति हमारे प्रधानमंत्री का बेहद संतुलित दृष्टिकोण है.'
मीडिया ब्रीफिंग में लावरोव ने आगे कहा कि ब्रिक्स का वर्तमान अध्यक्ष और क्षेत्रीय स्थिरता में प्रत्यक्ष हित रखने वाला एक प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता होने के कारण प्रमुख हितधारकों को बातचीत के लिए एकसाथ लाने में मदद कर सकता है.