नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष तेज होने से तेल आपूर्ति का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता, इसकी चपेट में आ गया है. यहां क्रूड स्टॉक सिर्फ 25 दिनों का बचा है, जबकि गैसोइल, पेट्रोल और एलपीजी के भंडार भी बहुत कम हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से भारत का 40% तेल आता है, अब लगभग बंद हो चुका है. ऐसे में रूस ने भारत की मदद का हाथ बढ़ाया है और तेल की बड़ी खेप भेजने को तैयार है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी क्रूड से लदे जहाज भारतीय जल के पास हैं और कुछ हफ्तों में ही भारत पहुंच सकते हैं. एक उद्योग सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि ये 9.5 मिलियन बैरल तेल भारत की जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकते हैं. रूस भारत की कुल क्रूड जरूरत का 40% तक पूरा करने को तैयार है. ये जहाज पहले कहीं और जा रहे थे, लेकिन अब भारत के लिए डायवर्ट किए जा सकते हैं.
भारत रोजाना करीब 5.6 मिलियन बैरल क्रूड प्रोसेस करता है, जिसमें से 40% होर्मुज से गुजरता है. ईरान पर अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद जहाजों पर हमले हुए, जिससे यह रास्ता लगभग बंद हो गया. सरकार के एक सूत्र ने कहा कि 10-15 दिनों में वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश तेज हो गई है. रिफाइनरों के पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का स्टॉक भी बहुत कम बचा है.
जनवरी में रूसी तेल आयात घटकर 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो कुल आयात का सिर्फ 21.2% था. फरवरी में यह बढ़कर 30% हो गया. अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर टैरिफ हटाने का ऐलान किया था, लेकिन भारत ने रूस से खरीदारी जारी रखी. ट्रंप ने कहा था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा, पर भारत ने विविधीकरण की नीति पर जोर दिया.
यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल छूट पर बिकता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. अब यह विक्रेता का बाजार बन गया है. रूस भारत को एलएनजी भी बेचने को तैयार है, क्योंकि कतर ने उत्पादन रोक दिया है. भारतीय कंपनियां कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई कम कर चुकी हैं. ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना से होर्मुज में टैंकरों की सुरक्षा का वादा किया है.