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'दक्षिण के राज्यों की हिस्सेदारी घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी', अमित शाह ने समझाया 850 सीटों का पूरा गणित

लोकसभा में परिसीमन बिल पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने 850 सीटों का पूरा गणित समझाया. उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों को आश्वासन दिया कि उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी नहीं घटेगी, बल्कि बढ़ेगी. विपक्ष के आरोपों का उन्होंने विस्तार से जवाब दिया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'दक्षिण के राज्यों की हिस्सेदारी घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी', अमित शाह ने समझाया 850 सीटों का पूरा गणित
Courtesy: ani

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन के जरिए दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक ताकत कम करना चाहती है. गृह मंत्री अमित शाह ने इस आरोप का जवाब देते हुए 850 सीटों का पूरा गणित सदन के सामने रखा और कहा कि दक्षिण के राज्यों की चिंता बेबुनियाद है.

850 का लॉजिक क्या है?

अमित शाह ने सदन में समझाया कि 850 सीटों का आंकड़ा राउंड फिगर है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 100 सीटें हैं और 33% महिला आरक्षण देना है तो 50% सीटें बढ़ाकर कुल 150 कर दी जाती हैं. इसमें 33% महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी और बाकी 100 सीटें सामान्य रहेंगी. इसी तरह वर्तमान 543 सीटों में 50% बढ़ोतरी करने पर कुल 816 सीटें होंगी, जिसे राउंड फिगर करके 850 कहा जा रहा है.

दक्षिण राज्यों को नहीं होगा नुकसान

शाह ने स्पष्ट आंकड़ों के साथ आश्वासन दिया कि दक्षिण के किसी भी राज्य की लोकसभा में हिस्सेदारी नहीं घटेगी. तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी. कर्नाटक की 28 से 42, आंध्र प्रदेश की 25 से 38, तेलंगाना की 17 से 26 और केरल की 20 से 30 हो जाएंगी. दक्षिण राज्यों की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और उनकी प्रतिशत हिस्सेदारी भी बढ़ेगी.

विपक्ष के आरोपों का जवाब

अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे झूठा नैरेटिव गढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि परिसीमन से दक्षिण के राज्यों की ताकत कम होने का डर बेबुनियाद है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जातीय जनगणना कराने के लिए तैयार है. शाह ने कहा कि परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा और इससे सभी राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा.

सत्र का महत्व और आगे क्या?

यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं. अगर बिल पास हो गए तो 2029 के लोकसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होंगे और महिला आरक्षण भी लागू हो जाएगा. अमित शाह के स्पष्ट आंकड़ों के बाद भी विपक्ष अपना विरोध जारी रखे हुए है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की उम्मीद है.