New Criminal Code Bill: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नए आपराधिक संहिता विधेयक पेश किए हैं. ये विधेयक लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में पेश हुआ है. इस दौरान अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आजादी के बाद से देश में सबसे कम मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. उन्होंने उच्च सदन को बताया कि भारतीय न्याय संहिता के तहत, जिसका उद्देश्य भारतीय दंड संहिता को प्रतिस्थापित करना है, मॉब लिंचिंग को मृत्युदंड द्वारा दंडनीय अपराध बना दिया गया है.
शाह ने कहा कि हमने भारतीय न्याय संहिता के तहत 21 नए अपराध जोड़े हैं और उनमें से एक मॉब लिंचिंग भी है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि हम पर मॉब लिंचिंग में दोषियों को बचाने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, विपक्ष ने कभी कोई कानून नहीं बनाया है, लेकिन हमने बनाया है. हो सकता है हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं होगा और हम इससे सख्ती से निपटेंगे. बताया गया है कि भारतीय न्याय संहिता के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, जिसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की जगह ली है और भारतीय साक्ष्य संहिता, जिसने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है, को बुधवार को लोकसभा द्वारा और गुरुवार को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया है.
IPC: भारतीय दंड संहिता (IPC) की स्थापना वर्ष 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. बताया जाता है कि भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिशों पर इसको बनाया गया था. इसे 1833 के चार्टर अधिनियम के तहत 1834 में स्थापित किया गया था. इसका नेतृत्व थॉमस बबिंगटन मैकाले ने किया था. हालांकि यह संहिता 1 जनवरी, 1862 को अधिनियमित की गई थी और रियासतों को छोड़कर पूरे तत्कालीन ब्रिटिश भारत में लागू की गई थी. आजादी के बाद भारत सरकार ने इसे भारतीय गणराज्य की आपराधिक संहिता के रूप में अपनाया था. इसके तहत तय किया जाता है कि कौन सा काम अपराध है और इसके लिए क्या सजा होनी चाहिए? IPC में कुल 511 धाराएं हैं, जिसमें 21 नए अपराध शामिल किए गए हैं.
CrPC: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) भारत में एक कानूनी कानून है जो देश में आपराधिक कानून के प्रक्रियात्मक पहलुओं को नियंत्रित करता है. यह आपराधिक मामलों की जांच, सुनवाई और न्यायनिर्णयन के लिए एक रूपरेखा देते है. सीआरपीसी उन प्रक्रियाओं की रूपरेखा तैयार करती है, जिनका कानून प्रवर्तन एजेंसियों, न्यायपालिका और आपराधिक न्याय प्रणाली में शामिल अन्य पक्षों को आपराधिक मामलों से निपटने के दौरान पालन करना होता है. इसमें विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जिसमें संदिग्धों की गिरफ्तारी और हिरासत, जांच का संचालन, साक्ष्य के नियम और दोषी व्यक्तियों की सजा शामिल है. सीआरपीसी में कुल 484 धाराएं हैं. संसद में विधेयक पेश होने के बाद अब इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नाम से जाना जाएगा. अब इसमें कुल 531 धाराएं होंगी. इसमें 177 धाराओं को बदला, 9 धाराओं को जोड़ा और 14 धाराओं को खत्म किया गया है.
Indian Evidence Act: किसी भी दर्ज अपराध के मामले में साक्ष्यों का संकलन, बयान का दर्ज करना समेत अन्य प्रक्रिया भारतीय साक्ष्य संहिता (Indian Evidence Act) के तहत आती है. पूर्व में इसमें कुल 167 धाराएं होती थीं, जो अब 170 हो गई हैं. साथ ही इसकी 24 धाराओं को बदला गया है. जबकि दो 7 धाराओं को खत्म करने के साथ 2 धाराएं जोड़ी गई हैं.
भारत की सुरक्षा, अखंडता और एकता के लिए खतरा पैदा करने वाला काम आतंकवाद की श्रेणी में आता था. हालांकि आईपीसी की धाराओं में इसके लिए कोई खास परिभाषा नहीं थी, लेकिन कुछ मामलों को लेकर आतंकवाद की कार्रवाई की जाती थी. अब नए कानून के तहत आतंकवाद में आर्थिक सुरक्षा को जोड़ा गया है. नए कानून के तहत नकली नोटों की तस्करी भी अब आतंकवाद की श्रेणी में होगी.
अब तक देश में राजद्रोह नाम का शब्द हुआ करता था. आईपीसी की धारा 124ए के तहत राजद्रोह के केस में तीन साल की सजा होता थी. अब इसे देशद्रोह के नाम से जाना जाएगा. इसके तहत अब कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी. ताजा अपडेट के मुताबिक अब देशद्रोह के अपराधियों को 7 साल या फिर उम्रकैद की सजा का प्रावधान है.
नए आपराधिक कानून के तहत आईपीसी की धारा 375 में रेप जैसे अपराध की परिभाषा दी गई है. इसमें 7 बिंदुओं में बताया गया है कि रेप कब माना जाएगा. इसके बाद धारा 376 में दुष्कर्म के लिए दी जाने वाली सजा के प्रावधानों में बदलाव किया गया है. अब 10 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है.
नए आपराधिक कानूनों में सबसे ज्यादा अहम मॉब लिंचिंग को माना गया है. इसके लिए भारतीय न्याय संहिता में अब कठोर प्रावधान किए गए हैं. आरोप सिद्ध होने पर अब 7 साल की सजा या फिर मृत्यु दंड तक दिया जा सकता है. केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से दावा किया गया है कि अब लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा.