नई दिल्ली: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और बड़े राजनीतिक उलटफेर की अटकलें लगने लगी हैं. ताजा चर्चा सत्ताधारी महायुति गठबंधन से जुड़े राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और उप मुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर है. खबर है कि पुणे नगर निगम चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए अजित पवार कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की संभावना टटोल रहे हैं. इस पहल ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल से फोन पर संपर्क किया और पुणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर संभावित तालमेल पर चर्चा की. बातचीत के दौरान अजित पवार ने गठबंधन की संभावना पर विचार करने का प्रस्ताव रखा. इस पर सतेज पाटिल ने स्पष्ट किया कि किसी भी फैसले से पहले पार्टी नेतृत्व से चर्चा जरूरी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पुणे नगर निगम में सम्मानजनक सीट हिस्सेदारी चाहती है.
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि फिलहाल एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना बेहद कम है. सबसे बड़ी वजह सीटों का बंटवारा है. 165 सदस्यीय पुणे नगर निगम में कांग्रेस कम सीटों पर समझौते के पक्ष में नहीं है. पार्टी का तर्क है कि पुणे लोकसभा सीट पहले से ही कांग्रेस के पास है और जमीनी स्तर पर अपनी ताकत बनाए रखने के लिए नगर निगम चुनाव में भी मजबूत उपस्थिति जरूरी है.
सूत्रों के अनुसार, भाजपा और अजित पवार गुट की एनसीपी पुणे नगर निगम चुनाव अलग-अलग लड़ने की तैयारी में हैं. महायुति के भीतर स्थानीय स्तर पर समीकरण अलग होने की वजह से यह फैसला लिया गया है. वहीं कांग्रेस अपने महाविकास आघाड़ी सहयोगियों शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार की एनसीपी एसपी के साथ भी संभावनाओं पर बातचीत कर रही है.
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है. पार्टी एक तरफ अजित पवार के साथ संभावित गठबंधन के फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है. दूसरी तरफ वह अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने को लेकर भी गंभीर है. जानकारों के मुताबिक, पुणे नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति कई विकल्पों पर आधारित है और अंतिम फैसला स्थानीय राजनीतिक हालात को देखकर लिया जाएगा.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार की यह पहल महाराष्ट्र की राजनीति में नई हवा का संकेत है. भले ही गठबंधन साकार हो या न हो, लेकिन उप मुख्यमंत्री द्वारा खुद कांग्रेस से संपर्क करना यह दिखाता है कि आने वाले नगर निगम चुनावों में मुकाबला कड़ा होने वाला है. पुणे नगर निगम चुनाव अब सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम राजनीतिक मैदान बनता जा रहा है.