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संजय कपूर की मौत के बाद 'फैमिली ड्रामा', मां रानी कपूर ने AGM की मीटिंग से पहले किस पर लगाए जबरन हस्ताक्षर करवाने के आरोप?

रानी कपूर ने अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे की मौत के बाद उन्हें कई बार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने लिखा, “मुझे बंद कमरों में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और बार-बार अनुरोध के बावजूद, उन दस्तावेजों का विवरण मुझे नहीं बताया गया.

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Mayank Tiwari

सोना कॉम्स्टार की प्रमुख शेयरधारक और दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर ने कंपनी की वार्षिक आम सभा (एजीएम) को स्थगित करने की मांग की है. उन्होंने अपने बेटे की अचानक मौत के बाद भावनात्मक संकट, पारदर्शिता की कमी और पारिवारिक विरासत पर कब्जे की कोशिशों का हवाला दिया है. यह मांग कंपनी में बढ़ते पारिवारिक और कॉर्पोरेट तनाव को दिखाती है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संजय कपूर, जो सोना कॉम्स्टार के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष थे, उसका 12 जून 2025 को इंग्लैंड में निधन हो गया. 53 वर्षीय संजय की मृत्यु पोलो खेलते समय मधुमक्खी के डंक से प्रेरित हृदयाघात के कारण हुई. उनकी मौत ने परिवार और व्यापारिक समुदाय को झकझोर दिया.

संजय कपूर की असामयिक मौत और विवाद की शुरुआत

उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद, 23 जून को बोर्ड ने जेफ्री मार्क ओवरली को नया अध्यक्ष नियुक्त किया. लेकिन अब, 6 हफ्ते से भी कम समय में, रानी कपूर ने इस नियुक्ति और कंपनी के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रानी कपूर ने शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में कहा, 25 जुलाई को तय एजीएम को कम से कम दो हफ्ते के लिए स्थगित करने की मांग की. उन्होंने इसे “अनुचित और समय से पहले” आयोजित सभा करार दिया, जो उनके परिवार के गहरे शोक के समय में हो रही है.

जबरदस्ती और पारदर्शिता की कमी के आरोप

रानी कपूर ने अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे की मौत के बाद उन्हें कई बार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया, बिना किसी स्पष्ट व्याख्या या पढ़ने का अवसर दिए. उन्होंने लिखा, “मुझे बंद कमरों में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और बार-बार अनुरोध के बावजूद, उन दस्तावेजों का विवरण मुझे नहीं बताया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उनके बैंक खातों तक पहुंच से वंचित कर दिया गया है और वे “कुछ चुनिंदा लोगों पर निर्भर” हो गई हैं. रानी कपूर ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्ति उनकी भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर समूह पर नियंत्रण करने के लिए फैसलों को आगे बढ़ा रहे हैं.

उनके वकील, वैभव गग्गर ने पत्रकारों से कहा कि संजय कपूर की मौत के बाद की घटनाएं “सामान्य नहीं लगतीं”. उन्होंने कहा कि रानी कपूर को अभी तक उनके बेटे की मौत के बारे में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या दस्तावेज नहीं मिला है. “बेहद परेशान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं,” उनके पत्र में चेतावनी दी गई है.

पारिवारिक विरासत और शेयरधारिता का दावा

रानी कपूर ने दावा किया कि वह अपने पति सुरिंदर कपूर की 30 जून 2015 की वसीयत के आधार पर सोना कॉम्स्टार की प्रमुख शेयरधारक हैं. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने किसी भी नई बोर्ड नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी है और न ही परिवार के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी को अधिकृत किया है. उनके पत्र में कहा कि मैंने अपने बेटे की मृत्यु के बाद कंपनी या सोना समूह की किसी अन्य कंपनी के बोर्ड में किसी को नामित करने की सहमति नहीं दी.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके द्वारा मजबूरी में हस्ताक्षर किए गए दस्तावेजों का दुरुपयोग कर रहे हैं और परिवार के हितों का प्रतिनिधित्व करने का झूठा दावा कर रहे हैं. रानी कपूर ने कहा कि उन्हें बोर्ड स्तर के निर्णयों और कंपनी के मामलों की कोई जानकारी नहीं दी गई है, और वे केवल मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रही हैं.

एजीएम के एजेंडे पर जताई आपत्ति

रानी कपूर की आपत्तियों का केंद्र एजीएम के एजेंडे में शामिल कुछ प्रस्ताव हैं, जिनमें कपूर परिवार के प्रतिनिधियों के रूप में कुछ व्यक्तियों की नियुक्ति शामिल है, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी या सहमति नहीं थी. उनके पत्र में कहा, “ये घटनाक्रम पारदर्शिता या प्रमुख पारिवारिक हितधारकों के साथ परामर्श के बिना समूह पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश का संकेत देते हैं. इस खबर और कंपनी के भीतर बढ़ते तनाव के बाद, सोना बीएलडब्ल्यू सोना कॉम्स्टार के शेयरों में लगभग 2.54% की गिरावट दर्ज की गई, जो दोपहर 1:18 बजे के आसपास लगभग 478 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ.