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Kolkata Rape Murder case: महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या करने वाले संजय रॉय को उम्रकैद की सजा, सियालदह कोर्ट ने सुनाया फैसला

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप मर्डर केस में आज संजय रॉय को सजा मिली. दोषी संजय रॉय को सियालदह कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. 12:30 बजे कोर्ट ने दोषी संजय, CBI और पीड़ित परिवार के वकील की बातें सुनीं. जज अनिर्बान दास ने संजय से कहा कि यह बताया जा चुका है कि तुम किन अपराधों के दोषी हो.

Gyanendra Sharma
Kolkata Rape Murder case: महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या करने वाले संजय रॉय को उम्रकैद की सजा, सियालदह कोर्ट ने सुनाया फैसला
Courtesy: Social Media

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप मर्डर केस में आज संजय रॉय को सजा मिली. दोषी संजय रॉय को सियालदह कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. 12:30 बजे कोर्ट ने दोषी संजय, CBI और पीड़ित परिवार के वकील की बातें सुनीं. जज अनिर्बान दास ने संजय से कहा कि यह बताया जा चुका है कि तुम किन अपराधों के दोषी हो.

कोलकाता पुलिस के पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सजा सुनाने के लिए कोलकाता की अदालत में लाया गया. सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अनिरबन दास ने सजा सुनाने से पहले सोमवार को करीब साढ़े 12 बजे संजय रॉय का बयान सुना.

सजा सुनाए जाने के दौरान संजय रॉय के वकील ने कहा, भले ही यह दुर्लभतम मामला हो, लेकिन इसमें सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए. अदालत को यह दिखाना होगा कि दोषी क्यों सुधार या पुनर्वास के लायक नहीं है... सरकारी वकील को सबूत पेश करने होंगे और कारण बताने होंगे कि वह व्यक्ति सुधार के लायक क्यों नहीं है और उसे समाज से पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए...पीड़िता के परिवार के वकील ने कहा, "मैं अधिकतम सजा के तौर पर मौत की सजा चाहता हूं. सजा के ऐलान से पहले पेशी के दौरान संजय जज के सामने गिड़गिड़ा रहा था. उसने जज के सामने कहा कि मैं दोषी नहीं हूं. मुझे फंसाया जा रहा है. 

31 वर्षीय प्रशिक्षु डॉक्टर का यौन उत्पीड़न करने और उसकी गला घोंटकर हत्या करने के मामले में दोषी पाए गए संजय रॉय को न्यायाधीश ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत दोषी ठहराया. धारा 66 (पीड़ित की मृत्यु या उसे लगातार अचेत अवस्था में पहुंचाने के लिए सजा) में कम से कम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ है उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास, या मृत्युदंड.