West Bengal Assembly Election 2026

राम मंदिर का ताला खोले जाने की दिलचस्प कहानी, जानें 1986 में क्या हुआ?

 कांग्रेस पार्टी 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के आगामी अभिषेक में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस ने इसे भाजपा और आरएसएस का समारोह बताते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण अभी आधा-अधूरा है.

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के आगामी अभिषेक में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस ने इसे बीजेपी और आरएसएस का समारोह बताते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण अभी आधा-अधूरा है. कांग्रेस के नेता यह दलील दे रहे है कि राम मंदिर का ताला पूर्व पीएम राजीव गांधी ने खुलवाए थे. आईए आज हम आपको इससे जुड़े हुए इतिहास से रूबरू कराते है.

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पहले से ही कई दशकों से अदालतों में रहा. मंदिर निर्माण के दौरान आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने यह रुख अपनाया कि मंदिर का निर्माण आस्था का मामला है, मुकदमेबाजी का नहीं. 

1986 में RSS प्रतिनिधि सभा ने क्या की थी मांग?

1986 में आरएसएस प्रतिनिधि सभा ने सरकार से जन्मभूमि स्थल और निकटवर्ती भूमि राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने का आग्रह किया. उसके अगले साल संघ ने सरकार से कहा कि गुजरात में सोमनाथ मंदिर की तरह प्राचीन लेकिन जीर्ण-शीर्ण राम जन्मभूमि मंदिर को भी उसके पुराने गौरव को बहाल करने की आवश्यकता है. बीजेपी का भी मानना ​​था कि यह विवाद अदालत के दायरे से बाहर है.

बीजेपी ने 1989 के पालमपुर प्रस्ताव में कहा गया था कि इसे दोनों समुदायों के बीच आपसी बातचीत के माध्यम से या यदि यह संभव नहीं है तो कानून के माध्यम से हल किया जाना चाहिए. मुकदमेबाजी किसी भी तरह से इस मामले का समाधान नहीं है. बाद के वर्षों में BJP ने मंदिर आंदोलन को धार देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा. 

राम जन्मभूमि के ताले खोलने का आदेश 

आंदोलन के लिए वीएचपी टीम में अशोक सिंघल ने यूपी कांग्रेस के पूर्व नेता और मंत्री दाऊ दयाल खन्ना और पूर्व आईपीएस अधिकारी श्रीश चंद्र दीक्षित को शामिल किया था. विहिप ने राजीव गांधी की सरकार के अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. वीएचपी बाबरी मस्जिद के ताले खोलने की मांग पर अड़ी रही.

1 फरवरी 1986 को फैजाबाद की एक स्थानीय अदालत ने राम जन्मभूमि के ताले खोलने का आदेश दिया. कांग्रेस नेता खुले तौर पर श्रेय तो नहीं ले सके, लेकिन चुपचाप यह संदेश देने का काम किया कि ताले उन्हीं की सरकार ने खुलवाए हैं.