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India Daily

विश्व स्तर पर भारतीय वायुसेना की धूम, ब्रिटिश रॉयल एयर फाॅर्स के लिए 'कोच' बने IAF के जांबाज; RAF वैली में होगी खास ट्रेनिंग

भारतीय वायु सेना अब पहली बार ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के पायलटों को प्रशिक्षित करेगी. दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद लिया गया यह निर्णय रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा.

Kanhaiya Kumar Jha
विश्व स्तर पर भारतीय वायुसेना की धूम, ब्रिटिश रॉयल एयर फाॅर्स के लिए 'कोच' बने IAF के जांबाज; RAF वैली में होगी खास ट्रेनिंग
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम के रक्षा संबंधों ने एक ऐतिहासिक मोड़ लिया है. अब तक दुनिया ने भारतीय सेनाओं को विदेशी ताकतों से सीखते देखा था लेकिन अब भारतीय वायु सेना (IAF) ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) को युद्ध कौशल सिखाएगी. ब्रिटिश उच्चायोग ने इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक 'बड़ा मील का पत्थर' बताया है. नई दिल्ली में आयोजित 19वीं वायु सेना वार्ता के बाद इस अभूतपूर्व सैन्य सहयोग पर सहमति बनी है जो दोनों वायु सेनाओं के बीच गहरे होते भरोसे को दर्शाता है.

ब्रिटिश उच्चायोग के रक्षा विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस उपलब्धि की घोषणा की है. यह पहली बार है जब भारतीय वायु सेना के प्रशिक्षक रॉयल एयर फोर्स के पायलटों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे. इस कदम को भविष्य के युद्धों के लिए दोनों सेनाओं के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है. यह समझौता वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत की बढ़ती सैन्य विशेषज्ञता की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है.

पायलटों की तैनाती और ट्रेनिंग बेस 

इस विशेष समझौते के तहत भारतीय वायु सेना अपने तीन योग्य उड़ान प्रशिक्षकों (QFI) को ब्रिटेन भेजेगी. इन प्रशिक्षकों की तैनाती ब्रिटेन के प्रमुख ट्रेनिंग बेस 'आरएएफ वैली' (RAF Valley) में की जाएगी. यह बेस ब्रिटिश फास्ट जेट पायलटों के प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र है. भारतीय प्रशिक्षक वहां ब्रिटिश पायलटों को तेज रफ्तार वाले जेट विमान उड़ाने की बारीकियां सिखाएंगे. यह सहयोग न केवल तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान है बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने वाला है.

दो साल का कार्यकाल और योजना 

भारतीय वायु सेना के प्रशिक्षकों की यह तैनाती शुरुआत में दो साल की अवधि के लिए तय की गई है. नई दिल्ली में आयोजित हुई 19वीं वायु सेना वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की शपथ ली है. इस सहयोग के माध्यम से भारत और ब्रिटेन की वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ और तालमेल में सुधार होने की उम्मीद है. इस दौरान प्रशिक्षक हवाई सुरक्षा के नियमों और युद्धाभ्यास की जटिल प्रणालियों पर विशेष ध्यान देंगे.

वैश्विक संबंधों पर प्रभाव 

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग संस्थान में भारतीय पायलटों की मौजूदगी एक नए अध्याय की शुरुआत है. यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारतीय वायु सेना की प्रशिक्षण प्रणाली और उसके विमान चालकों के कौशल को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक ने सर्वोच्च सम्मान दिया है. इससे न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा निर्यात की संभावनाओं को बल मिलेगा बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी सुरक्षा सहयोग के नए ढांचे तैयार होने की प्रबल संभावना है.

भविष्य की संभावनाओं का द्वार 

भारतीय और ब्रिटिश वायु सेनाओं के बीच का यह परिचालन सहयोग भविष्य में बड़े पैमाने पर संयुक्त युद्धाभ्यास और रक्षा अनुसंधान के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा. आरएएफ वैली में भारतीय प्रशिक्षकों की सेवा लेना यह पुख्ता करता है कि भारत अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि एक सक्षम मार्गदर्शक बनकर उभर रहा है. इस ऐतिहासिक कदम से दोनों देशों के पायलटों को एक-दूसरे की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को सीखने और जटिल परिस्थितियों में साथ मिलकर काम करने का शानदार अवसर मिलेगा.